भाजपा बाबा से है भयभीत 

एक दर्जन विधायकों के हारने का खतरा 

बाबा समर्थकों का विरोध पड़ सकता है भाजपा को भारी

कुलदीप श्योराण 
चंडीगढ़। जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कल रोहतक की सुनारिया जेल में सिरसा डेरे के संचालक राम रहीम से मुलाकात की। बलात्कार के मामले में जेल काट रहे राम रहीम के साथ पंवार की आधे घंटे की मुलाकात के खास मायने हैं। पंवार ने जिस तरह बाबा के साथ मुलाकात की वह भाजपा की सियासी चिंताओं की पोटली खोलने जैसा है।

जहां पवार ने बाबा के साथ आधे घंटे तक हालचाल पूछा वहींं दूसरे कैदियों को महज कुछ सेकेंड ही अपनी बात उनके सामने रखने को मिले। इस दोगले व्यवहार के कारण कई गंभीर सवाल खड़े हो गए है?

-आखिर पवार को आधे घंटे तक राम रहीम से बात करने की जरूरत क्यों पड़ीँँ

-आखिर क्यों सजायाफ्ता बाबा का हाल-चाल पूछना पंवार को बेहद जरूरी लगा?

-आखिर क्यों जनता की नाराजगी की परवाह किए बगैर पंवार ने राम रहीम से मुलाकात की?
– आखिर क्यों भाजपा को राम रहीम की जरूरत महसूस हो रही है?
इन सवालों के जवाब खंगालने के लिए साढ़े 3 साल पहले 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले झांकने की जरूरत है।
 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने सिरसा डेरे के संचालक गुरमीत राम रहीम से समर्थन मांगा था। बलात्कार के मामलों में सीबीआई कोर्ट के शिकंजे में फंसे बाबा ने केंद्र में मोदी सरकार के प्रभाव से बचने की हसरत में भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। गुरमीत राम रहीम का समर्थन भाजपा के लिए करिश्माई साबित हुआ।

 बाबा के बलबूते पर भाजपा के एक दर्जन विधायक जीतने में सफल रहे चुनावी जंग जीतने में सफल रहे। इसी कारण भाजपा सरकार बनने का इतिहास रच दिया। बाबा के साथ भाजपा का प्यार- प्रेम बिल्कुल ठीक ट्रैक पर चल रहा था कि सीबीआई कोर्ट का फैसला भूकंप की तरह दोनों के बीच में आ गया। सीबीआई कोर्ट ने बाबा को 20 साल की सजा सुनाने का फैसला किया कोर्ट के फैसले के कारण ना चाहते हुए भी भाजपा सरकार को बाबा जेल भेजना पड़ा।

 बाबा के भक्त यह मानते हैं कि एक साजिश के तहत उनके गुरु को पंचकूला कोर्ट में बुलाया गया और उसके बाद उनको सजा सुनाई गई। उसके बाद हुए उपद्रव में 40 लोगों की मौत हुई और पूरे विश्व में हरियाणा एक बार फिर बदनाम हुआ है।भाजपा सरकार को हरियाणा की बदनामी की तो चिंता नहीं है मगर उसे अपने एक दर्जन विधायकों की हार की आशंका जरूर सता रही है।

 भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के अलावा वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, कमल गुप्ता, घनश्याम सर्राफ, विशंभर वाल्मीकि प्रेमलता, कुलवंत बाजीगर और असीम गोयल भी बाबा के भक्तों के प्रकोप के कारण अगले चुनाव में जीत से महरूम हो सकते हैं। 
साफ नजर आ रहा है कि सिर्फ बाबा के कारण ही भाजपा 46 से गिरकर 36 के आंकड़े पर लुढ़क जाएगी। यही कारण है कि भाजपा को बाबा के भक्तों ने भयभीत कर दिया है और भाजपा किसी तरह से बाबा को फिर से सेट करने के चक्कर में है।

भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि अगर बाबा ने जेल से भी अपने भक्तों को फरमान जारी कर दिया तो वह भाजपा के पक्ष में फिर मतदान कर सकते हैं। लेकिन भाजपा के रणनीतिकार यह नहीं जानते कि मजबूरी के आदेश को बाबा के भगत भी पहचानते हैं और यह लग रहा है कि अगले चुनाव में वह भाजपा के साथ बदला लेने को आतुर हैं।

 अगर बाबा के भक्तों ने भाजपा के प्रत्याशियों के खिलाफ एकमुश्त वोट दिए तो सिरसा हिसार कुरुक्षेत्र और अंबाला संसदीय सीटों के अलावा एक दर्जन विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को जीत के लाले पड़ जाएंगे। यही कारण है कि जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार आधे घंटे तक गुरमीत राम रहीम के साथ उनका हालचाल पूछते रहे।

 खरी खरी बात यह है कि भाजपा इसमें बेहद गंभीर हालत से गुजर रही है। यह सभी जानते हैं कि बाबा की मेहरबानी से ही उसे सत्ता हासिल हुई थी। अगले चुनाव में वह मेहरबानी नफरत के रुप में भाजपा के खिलाफ चुनावी जंग में वोट डालने का काम करेगी जिसके चलते भाजपा के दोबारा सत्ता में वापसी के आसार धराशाई हो जाएंगे। भाजपा सरकार पहले ही कई वर्गों में विरोध का सामना करना पड़ रही है। ऐसे में अगर बाबा के कट्टर भक्तों का प्रकोप चुनाव पर असर कर गया तो उसके लिए हालात बिगड़ जाएंगे। यही कारण है कि भाजपा किसी भी तरह बाबा के जरिए उनके भक्तों को नरम करने के जुगाड़ में है।

– अब देखना यह है कि भाजपा बाबा को किस तरह से अपने शीशे में उतार पाती है?

– क्या बाबा अपने भक्तों को भाजपा को वोट देने के लिए फिर से कहेंगे?
– क्या बाबा के भगत उनके मजबूरी के आदेश को मारने का काम करेंगे?
 यह तय है कि बाबा के भक्तों का फैसला भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर गाज गिराने का काम करता नजर आ रहा है। इसलिए भाजपा अभी से इस भीषण मार से बचने की जुगत में जुट गई है।

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