देश विरोधी एजेंडे को जनता ने दिखाया ठेंगा

सिद्धारमैया के ओछे हथकंडे नहीं आए काम
कुलदीप श्योराण
 कर्नाटक में आ जाए विधानसभा चुनाव के परिणाम भाजपा की विजय या कांग्रेस की पराजय की तराजू में तुले जा रहे हैं मगर इससे भी अधिक बड़ी बात यह है कि कर्नाटक की जनता ने देश विरोधी षड्यंत्रों को करारी मात देने का काम किया है। सत्ता बरकरार रखने के लिए कर्नाटक के कांग्रेसी CM सिद्धारमैया ने देश विरोधी हथकंडे अपनाने से गुरेज नहीं किया।
 उन्होंने सिर्फ वोटबैंक की नीति पर फोकस करते हुए कई ऐसे काम किए जो देश की एकता और अखंडता के लिए भीषण खतरा बन सकते हैं। अगर सिद्धारमैया सरकार बरकरार रह जाती तो वे इन षड्यंत्रों को लागू करने के लिए पुरजोर कोशिश करते जिसके चलते देश की एकता और अखंडता पर व्यापक खतरा मंडराने के आसार बन जाते।
 सिद्धरमैया द्वारा अपनाए गए देश विरोधी हथकंडों का विवरण इस प्रकार है-
हथकंडा नंबर 1 
अलग झंडे का राग
 सिद्धारमैया ने कर्नाटक के कम पढ़े लिखे लोगों को बरगलाने के लिए कर्नाटक के अलग झंडे का राग अलापा। उन्होंने बकायदा कर्नाटक के लिए अलग झंडे का प्रस्ताव पास करते हुए उसे जारी भी कर दिया।
 इस समय देश में सिर्फ तिरंगा ही पूरे देश का प्रतीक है। किसी भी राज्य का अलग से कोई झंडा नहीं है। ऐसे में सीदारमैया द्वारा कर्नाटक के लिए अलग से झंडे का ऐलान करना देश की एकता और अखंडता पर बड़ी चोट साबित हो सकता है। अगर उसी तरह बाकी राज्य भी अपने-अपने झंडे बनाने की दौड़ में लग जाते तो राष्ट्रीय झंडे की बजाय सब प्रादेशिक झंडों को ही अपनी आन-बान- शान का प्रतीक बना लेते जिसके चलते तिरंगे का महत्व खत्म हो जाता।
 हथकंडा नंबर 2
   हिंदी का कट्टर विरोध
 सिद्धारमैया ने कर्नाटक की राज्य भाषा कन्नड़ को लेकर लोगों की भावनाओं को भड़काते हुए राज्य में हिंदी के प्रचार और प्रसार पर अंकुश लगाने का काम किया। उन्होंने बेंगलुरु मेट्रो के स्टेशनों और बोर्डों पर लिखें हिंदी के नामों को मिटाने का आदेश दिया।
 इसके अलावा उन्होंने मेट्रो में काम करने वाले हिंदी भाषी लोगों की जगह कन्नड़ भाषी लोगों को नौकरी देने का फरमान जारी किया। सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटका में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ माहौल बनाने की निंदनीय मुहिम चलाई जिसके चलते हिंदी भाषी लोगों को कर्नाटक में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस तरह से सिद्धारमैया ने कर्नाटक में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का कार्य किया जो देश के सर्व सद्भाव भाईचारे पर करारी चोट कही जा सकती है।
हथकंडा नंबर 3
 लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा
 कर्नाटक में लगभग 20% वोटबैंक रखने वाले लिंगायत समुदाय को सिद्धारमैया सरकार ने अलग से अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा देने का प्रस्ताव पास किया। लिंगायत समुदाय भगवान शिवजी की पूजा अर्चना करता है और वह हिंदू धर्म का ही एक अटूट हिस्सा है, लेकिन लिंगायत वोटरों को अपने पाले में करने के लिए सिद्धारमैया ने उनको हिंदुओं से अलग होकर अलग समुदाय का दर्जा देने की हिंदू विरोधी साजिश रचने का काम किया। पूरी दुनिया में भगवान शिव जी का एक ही स्वरुप है और उनको लिंग स्वरुप में ही पूजा जाता है। लेकिन सिद्धरमैया सरकार ने लिंगायत समुदाय के शिव जी को हिंदुओं के शिवजी से अलग करार देते हुए उन्हें अलग संप्रदाय की मान्यता देने का काम किया। इस आधार पर दूसरे प्रदेशों के सत्तासीन नेता भी वोटबैंक के चक्कर में हिंदुओं को अल्पसंख्यक समुदायों में बांटने की मुहिम चला सकते थे जो पूरी तरह से धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ होता।
 खरी खरी बात यह है कि सिद्धारमैया ने कर्नाटक के चुनाव जीतने के लिए हर तरह के घटिया हथकंडे अपनाने का काम किया। यह तो कर्नाटक की जनता को सलाम जाता है जिसने इन साजिशों को नाकाम करते हुए सिद्धारमैया को की सरकार को सत्ता से बेदखल करने का काम किया। खुद सिद्धारमैया भी चामुंडेश्वरी सीट से हार गए। सत्ता हासिल करने के लिए सिद्धारमैया द्वारा अपनाए गए देश विरोधी हथकंडों को किसी भी तरह से जायज नहीं कहा जा सकता।
 उन्होंने विकास की राजनीति करने की बजाय समाज को बांटने और देश की एकता और अखंडता विरोधी भावनाओं को भड़काने का काम किया। कर्नाटक की जनता ने उनको सही सबक सिखाते हुए करारी शिकस्त देने का जनादेश जारी किया। उम्मीद है कि देश के दूसरे राज्यों में सत्ता पर काबिज नेता भी सिद्धारमैया के अंजाम से सबक लेते हुए कोई ऐसा काम नहीं करेंगे तो समाज और देश को बांटने का काम करें।

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