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एक तीर से किए पांच शिकार 
सही वक्त पर करेंगे भाजपा को क्लीन बोल्ड 
 कुलदीप श्योराण 
  महेंद्रगढ। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ने आज महेंद्रगढ़ जिले के दोगड़ा अहीर गांव में आयोजित विशाल जनसभा में जहां आर पार भाजपा के साथ आर पार करने का ऐलान तो नहीं किया मगर शतरंज की चाल चलते हुए उन्होंने बड़ा गेम खेल दिया। जनसभा में भारी भीड़ एकत्रित करके उन्होंने एक तीर से पांच टार्गेट हासिल करने का काम किया।
टार्गेट नंबर 1
 भाजपा पर बनाया प्रेशर
 राव इंद्रजीत ने भारी भीड़ के जरिए एक बार फिर भाजपा पर प्रेशर बनाने का काम किया। उन्होंने भाजपा को यह साफ साफ संकेत दे दिया कि अगर उनकी अनदेखी की गई तो वह कोई कड़ा फैसला लेने में नहीं हिचकिचाएंगे। भाजपा अभी इस कंडीशन में नहीं है कि वह राव इंद्रजीत के दिए बड़े झटके को सहन कर सके। इसलिए रैली से 3 दिन पहले भाजपा हाईकमान से राव इंद्रजीत के लिए मीठा संदेशा गया और उनको शांत रहने को कहा गया। इसी के चलते 3 तारीख से लेकर आज रैली समाप्ति तक राव इंद्रजीत और आरती राव के सुर बदले बदले रहे ।
इससे पहले 10 दिन तक आरती राव की रैली को लेकर आयोजित ग्राम सभाओं में आक्रामक शैली रही। बाप-बेटी बेटी का यह बदला अंदाज यह साबित कर गया कि हाईकमान के इशारे के अनुसार काम करना ही बेहतर है। अभी चुनाव में काफी समय बाकी रहने के चलते राव इंद्रजीत अपने बकाया कामों को इस प्रेशर पॉलिटिक्स के जरिए निकलवाने का काम करेंगे।
टारगेट नंबर 2
मनवाया अपना लोहा 
राव इंद्रजीत ने जनसभा में भारी भीड़ एकत्रित करके एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अहीरवाल में उनसे बड़ा कोई दूसरा नेता नहीं है। यह सच भी है कि अहीरवाल का कोई भी अन्य नेता इतनी बड़ी जनसभा करने का दमखम नहीं रखता है। इंद्रजीत के खेमे को जनसभा में 20 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद थी। वह संख्या लक्ष्य से बेशक 25 फिसदी कम रह गई लेकिन फिर भी भीड़ का आंकड़ा राव इंद्रजीत का मजबूत जनाधार साबित करने के लिए काफी था।
 टारगेट नंबर 3 
बेटी को दिलवाया आशीर्वाद 
राव इंद्रजीत अपनी बेटी आरती राव को अपना सियासी वारिस बना रहे हैं। उसके धमाकेदार राजनीतिक आगाज के लिए वह सारे समीकरण खंगाल रहे हैं। आज की जनसभा आरती राव को समर्थकों और जनता का आशीर्वाद दिलाने के लिए ही आयोजित की गई थी। जनसभा में जिस तरह आरती राव के समर्थन में नारेबाजी हुई वह इस बात का प्रतीक है कि राव इंद्रजीत के समर्थकों ने उनको अपना आशीर्वाद दे दिया है । बेटी आरती राव के सियासी भविष्य के लिए ही राव इंद्रजीत सारे पापड़ बेल रहे हैं और उसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे भाजपा को छोड़ने का एलान कर सकते हैं।
 टारगेट नंबर 4
  ताकत का लगाया हिसाब-किताब
 राव इंद्रजीत ने रैली के जरिए अपनी ताकत को परखने का भी काम किया। 2014 के चुनाव के बाद राव इंद्रजीत ने एक बार भी अपनी भीड़ खींचने की क्षमता को नहीं परखा था। इसलिए उन्होंने इस रैली का आयोजन किया ताकि भविष्य में बड़े शक्ति प्रदर्शन से पहले अपनी ताकत का आकलन कर लिया जाए। रैली में नेताओं की संख्या भी उनके लिए बेहद मायने रखती है। रैली में सोहना, अटेली और नांगल चौधरी के विधायकों ने भाग नहीं लिया जिससे यह साबित हो गया कि वे राव इंद्रजीत से दूरी रखने को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।उनके साथ पटोदी, बावल, कोसली, महेंद्रगढ़ और नारनोल के पांच विधायक स्टेज पर मौजूद थे। इसके अलावा स्थानीय सांसद धर्मबीर की मौजूदगी सियासी आंकड़ों को तय करने का काम कर गई। नेताओं की हाजिरी के अनुसार राव इंद्रजीत अब अपने भविष्य की रणनीति पर बेहतर तरीके से काम कर पाएंगे।
टार्गेट नंबर 5 
इनेलो बसपा को दीया साफ संकेत
 जोरदार जनसभा के जरिए राव इंद्रजीत ने इनेलो और बसपा को यह साफ संकेत दे दिया है कि अगर वह अहीरवाल में चुनावी सफलता हासिल करना चाहते हैं तो उनको हर हाल में उनके साथ गठबंधन करना होगा। अहीरवाल में यादव, जाट और दलित वोटरों का कंबीनेशन एकतरफा जीत का आधार बनता है। यादव वोटरों के बिना इनेलो और बसपा के लिए बाढड़ा से लेकर सोहना तक एकतरफा चुनावी सफलता हासिल करना संभव नहीं होगा। अगर इनेलो-भाजपा और राव इंद्रजीत एक पलड़े पर आ गए तो अहीरवाल में उसी तरह कांग्रेस और भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा जिस तरह 2014 के चुनाव में भाजपा ने किया था।
 खरी खरी बात यह है कि राव इंद्रजीत की आज की जनसभा पूरी तरह चक्रव्यू की तरह रखी गई थी। राव इंद्रजीत ने पूरा हिसाब किताब लगाते हुए इस जनसभा का एलान किया था। रैली में आई भारी भीड़ उनके तमाम सियासी आकलनों को पूरा करने का काम कर गई है। अब भाजपा सरकार उनकी अनदेखी करने का रिस्क नहीं लेगी और उनको ज्यादा सरकार में हिस्सेदारी देने का काम करेगी।
इंद्रजीत भी चाहते हैं कि वह अगले चुनाव से पहले कुछ महत्वपूर्ण काम सरकार से निकलवा ले और उसके बाद बेटी के भविष्य को लेकर निर्णायक फैसला लें।हाईकमान के आग्रह और आदेश के बाद राव इंद्रजीत ने अपने तल्ख तेवर तो नरम जरूर कर लिए मगर भाषण के अंत में उनका यह कहना कि ‘बाकी बातें बाद में करेंगे’ खास मायने रखता है।
 बाकी बातों को बकाया रखना ” पिक्चर तो अभी बाकी है मेरे दोस्त” फिल्मी डायलॉग की याद दिला गया। यानी राव इंद्रजीत ने हालात को भागते हुए आज आर पार का ऐलान नहीं किया। वे लोहा गरम होने पर चोट करने की थ्योरी में विश्वास रखते हैं। “बाकी बातों का बकाया” यह इशारा कर गया कि वह सही समय पर भाजपा को छोड़ने का ऐलान जरूर करेंगे।
 सत्ता हासिल करने का ख्वाब देख रहे इनेलो और
बसपा गठबंधन को भी इंद्रजीत की जनसभा से यह हिसाब लगा लेना चाहिए कि दोनों का गठबंधन सत्ता दिलाने की गारंटी नहीं है लेकिन अगर वह इंद्रजीत को साथ ले लेते हैं तो सत्ता का सरताज बनने से उनको कोई रोक नहीं पायेगा

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