Khari Khari News, 16. Sep. 2020

Kuldeep Sheoran, Panipat

कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव बनते ही रणदीप सुरजेवाला के तेवर और मिजाज पूरी तरह से बदल गए हैं। कुछ दिन पहले तक प्रदेश कांग्रेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा के साथ जुगलबंदी बनाकर घूमने वाले रणदीप सुरजेवाला अब अपने बलबूते पर ही अपने “मिशन” पर चल पड़े हैं। राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद प्रदेश के पहले दौरे में स्वागत कार्यक्रमों के दौरान यह साफ हो गया कि रणदीप सुरजेवाला ने खुद को कुमारी सेलजा से अलग कर लिया है।

रणदीप सुरजेवाला के काफिले में चल रहे कैंटर के दोनों तरफ लगे होर्डिंग में रणदीप सुरजेवाला के अलावा सिर्फ सोनिया गांधी और राहुल गांधी के फोटो ही लगाए गए थे। पार्टी डेकोरम के हिसाब से होर्डिंग पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा का फोटो लगाया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया वह सिर्फ रणदीप सुरजेवाला ने खुद को ही सोनिया गांधी व राहुल गांधी का एकमात्र “विश्वासपात्र” दिखाने का काम किया।

एक सप्ताह पहले कुमारी शैलजा रणदीप सुरजेवाला से पद और कद में बड़ी नजर आ रही थी और रणदीप सुरजेवाला उसी हिसाब से उनको सम्मान भी दे रहे थे लेकिन राष्ट्रीय महासचिव महासचिव बनते ही रणदीप सुरजेवाला के “सुर” बदल गए हैं और उन्होंने अपना “स्टेटस” कुमारी सेलजा से बड़ा मान लिया है। रणदीप सुरजेवाला के आज के पावर शो के लक्ष्य पर भी गहराई से झांकने पर साफ हो गया कि वह मुख्यमंत्री की “कुर्सी” के “टारगेट” को निकाल लेकर निकल चुके हैं।

कुमारी शैलजा को रणदीप सुरजेवाला ने अब छोड़ दिया है। 10 सितंबर को पिपली में किसानों के ऊपर लाठी चार्ज होने के बाद 11 सितंबर को रणदीप सुरजेवाला ने कुमारी शैलजा से अलग ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पिछले 6 महीने के दौरान यह पहला अवसर था जब रणदीप सुरजेवाला ने कुमारी शैलजा से अलग होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जब दोनों ही नेता एक शहर में आ रहे थे तो दोनों की एक ही प्रेस कॉन्फ्रेंस होनी चाहिए थी लेकिन कांग्रेस महासचिव के रूप में अपना “रुतबा” दिखाने के लिए रणदीप सुरजेवाला ने कुमारी सेलजा से अलग होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

आज रोड शो के दौरान होर्डिंग में कुमारी शैलजा का फोटो नहीं होना यह बता गया कि उन्हें कुमारी शैलजा की “जरूरत” नहीं है और वह अपने बलबूते पर ही सियासत का “रोडमैप” तैयार कर चुके हैं। उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी रणदीप सुरजेवाला कुमारी शैलजा से “किनारा” कर लेंगे लेकिन सियासत का यही तगाजा होता है कि एक ही पल में राहें जुदा हो जाते हैं और अलग खिचड़ी पका ली जाती है।

रणदीप सुरजेवाला राष्ट्रीय महासचिव के रूप में प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ा मुकाम हासिल करना चाहते हैं और इसीलिए उन्होंने कुमारी शैलजा का साथ छोड़ते हुए सिर्फ राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नाम पर ही सियासत करने का फैसला ले लिया है। अब देखना यह है कि रणदीप सुरजेवाला राहुल गांधी और सोनिया गांधी के बलबूते पर भूपेंद्र हुड्डा और कुमारी शैलजा के साथ कितना मुकाबला कर पाएंगे और प्रदेश में सबसे बड़ा स्टेटस कैसे हासिल कर पाएंगे।

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