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अगले जन्म दिन से पहले खट्टर की सियासी किस्मत का फैसला
कुलदीप श्योराण 
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर आज 64 वर्ष के हो गए । साढे 3 साल पहले भाजपा की पहली सरकार के पहले मुख्यमंत्री बनाने के कीर्तिमान को अपने नाम करने के बाद उन्होंने कई खट्टे मीठे अनुभवों को अपने कार्यकाल में शामिल किया है।
 अपने गोत्र खट्टर को नाम से हटाकर सिर्फ मनोहर लाल के नाम से खुद को प्रचार करने के अलावा उन्होंने अपनी सरकार को पहले की सरकारों से अलग दिखाने के लिए काफी कुछ नए फैसले लिए लेकिन उनका साढे 3 साल का कार्यकाल संत रामपाल, जाट आरक्षण आंदोलन और राम रहीम मामले में हुए उपद्रव, लूटपाट और लगभग 100 के मौतों के चलते खासा विवादों में रहा। तीनों ही मौकों पर उनकी कुर्सी जाते-जाते बची ।लेकिन हाईकमान के आशीर्वाद के चलते हुए हर संकट को टालने में सफल रहे समय के साथ-साथ मनोहर लाल खट्टर खुद को एक चतुर राजनेता के रूप में स्थापित करते जा रहे हैं।
वे अभी तक जन नेता के रूप में तो अपनी पैठ नहीं जमा पाए हैं लेकिन भाजपा में खुद को अभी भी सबसे आगे रखने में सफल रहे हैं । यही कारण है कि अभी तक भाजपा उनका कोई विकल्प नहीं तलाश पाई है। साढे तीन साल के दौरान उनके कई तरह के अंदाज देखने को मिले। उन अलग-अलग अवसरों के अंदाज़ को हमने एक सीरीज में पिरोकर आपके लिए प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
खरी खरी बात यह है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अभी तक भाजपा की सरकार के जनता में तूती बुलवाने में नाकाम रहे हैं। बढ़ती बेरोजगारी ,कर्मचारियों के लगातार चल रहे आंदोलनों, किसानों की नाराजगी और लचर कानून व्यवस्था के चलते एक सक्षम CM के रूप में खुद को साबित करने में असफल रहे हैं । यही कारण है कि उनको एक जोरदार CM के रूप में अभी तक जनता से मान्यता नहीं मिली है। वह लगातार अपनी छवि को बेहतर करने का प्रयास तो जरूर कर रहे हैं लेकिन उनकी हर प्लानिंग के फेल हो जाने के चलते वह मनचाहा लक्ष्य हासिल नहीं कर पा रहे हैं । थोक के हिसाब से अफसरों के तबादलों क बावजूद उनकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए उनकी खुद की घोषणाएं भी बहुत संख्या में लटक रही हैं।
अगले 6 महीने में अगर वह खुद के वर्किंग स्टाइल को बदलकर पार्टी कैडर को साथ लेकर चलने में कामयाब रहे तो सरकार और उनका खुद का रसूख कुछ पॉजिटिव होने के आसार बन सकते हैं वरना आने वाले चुनाव में भाजपा को अपनी नाकाम सरकार का खामियाजा उठाना पड़ेगा और दोबारा सत्ता में हासिल करने के लिए उसको कांटे भरे रास्तों से गुजरना होगा। ईमानदारी के मामले में तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जनता में अलग पहचान बना चुके हैं मगर एक काबिल CM के रूप में अभी उनको काफी कुछ करना बाकी है।
उनके पास बहुत कम समय खुद को साबित करने के लिए बाकी बचा है। ऐसे में उनके लिए यह जरूरी है कि वह अपनी गलतियों से सबक लेते हुए नए सिरे से बड़े पैमाने पर कड़े फैसले लेते हुए एक सफल CM के रूप में अपना नाम जनता के दिलों में दर्ज कराएं । अगर वे वर्तमान ढर्रे पर चलते रहे तो वह भाजपा के पहले और अंतिम CM भी साबित हो सकते हैं। सरकार को साढे 3  साल हो बीत जाने के कारण उनकी सरकार और उनके खुद के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। अगले चुनाव में जनता मोदी मैजिक बजाए हरियाणा सरकार की परफॉर्मेंस के आधार पर ही भाजपा को वोट देने का काम करेगी इसलिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के लिए हर हाल में खुद को बेहतरीन  CM साबित करना ही होगा।
अब देखना है कि अगले चुनाव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भाजपा की लुटिया डुबो देते हैं या करिश्मा करते हुए उसे दोबारा सत्ता का सरताज बनाते हैं। दिसंबर 2018 में लोकसभा चुनाव अगर हो गए तो उनका परिणाम ही खट्टर की सियासी तकदीर का फैसला साबित करने वाला होगा। लोकसभा चुनाव का परिणाम ही यह तय कर देगा कि वे भाजपा के लिए हुकुम का इक्का साबित हुए या भाजपा ने गलत घोड़े पर दांव लगा दिया।

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