Khari Khari News, 16. Sep. 2020

Kuldeep Sheoran, Baroda

तीन कृषि अध्यादेशों को लेकर चल रहे प्रदेश के किसानों के आंदोलन ने बरोदा उपचुनाव के समीकरण भी पूरी तरह से बदल दिए हैं। कुरुक्षेत्र में किसानों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज ने बरोदा के किसानों को बेहद आक्रोशित कर दिया है और वे आने वाले उपचुनाव में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन को करारा सबक सिखाने का ऐलान कर रहे हैं। जाट वोटरों में गठबंधन को लेकर बड़ी नाराजगी फैल गई है जिसके चलते गठबंधन को उपचुनाव में जाट वोट मिलने के आसार बहुत कम हो गए हैं।

बीजेपी-जेजेपी गठबंधन बरोदा का उप चुनाव जीतने के लिए जाट प्रत्याशी उतारने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा था। गठबंधन के रणनीतिकारों का मानना था कि जब तक 50 फिसदी जाट वोटरों में बड़ी हिस्सेदारी नहीं ली जाएगी तब तक उपचुनाव में जीत हासिल नहीं हो पाएगी। इसलिए जाट प्रत्याशी देने पर गंभीरता से विचार चल रहा था लेकिन किसान आंदोलन ने गठबंधन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

अब अगर गठबंधन ने जाट प्रत्याशी मैदान में उतारा तो भी उसे जाटों के वोट न के बराबर मिलेंगे। गैर जाट दावेदार योगेश्वर दत्त का टिकट काटकर जाट प्रत्याशी को टिकट देना गठबंधन के लिए दोहरा नुकसान करने का काम करेगा। योगेश्वर दत्त के टिकट कटने पर जहां ब्राह्मण वोटबैंक बीजेपी से नाराज हो जाएगा वहीं दूसरी तरफ किसान आंदोलन के कारण भड़के जाट वोटर भी गठबंधन प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे।

इन विपरीत हालात में भी अगर गठबंधन ने जाट प्रत्याशी को उतारने की गलती की तो वह उसकी सबसे बड़ी बेवकूफी होगी और पहले ही दिन गठबंधन जीत की दौड़ से बाहर हो जाएगा जिसके कारण वह ऐतिहासिक हार का शिकार भी हो सकता है। अब देखना यही है कि गठबंधन के रणनीतिकार समझदारी दिखाते हुए जाट प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला लेते हैं या आत्मघाती गलती करते हुए जाट चेहरे को टिकट देते हैं।

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