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हुड्डा ने दिखाया फिर राहुल गांधी को ठेंगा

विश्वासघात दिवस पर प्रदर्शनों से किया किनारा
भूपेंदर सिंह हुड्डा ने पुरे प्रदेश भर के कार्यक्रमों से बनाकर रखी दुरी
मात्र कुछ जिलों में हुड्डा समर्थित नेताओ ने किया आयोजन
 राहुल की आदेश की उड़ाई धज्जियां
कुलदीप श्योराण 
चंडीगढ़। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने एक बार फिर कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को ठेका दिखाने का काम कर दिया है भूपेंद्र हुड्डा ने आज राहुल गांधी द्वारा जारी किए गए आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ा डाली।
 राहुल गांधी ने मोदी सरकार के 4 साल पूरे होने पर वादाखिलाफी के खिलाफ पूरे देश में विश्वासघात दिवस मनाने का एलान किया था। हरियाणा में जहां प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर और रणदीप सुरजेवाला के खेमों ने विश्वासघात दिवस मनाया वहीं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इन आयोजनों में भागीदारी करना जरूरी नहीं समझा। हालाँकि उनके कुछ समर्थक नेताओं ने कुछ जगहों पर  इन आयोजनों में भागीदारी  की।
 राहुल गांधी के फरमान का इस तरह अनदेखा करना यह साबित कर गया कि भूपेंद्र हुड्डा अभी भी खुद को कांग्रेस हाईकमान से ऊपर मानते हैं और हाईकमान के आदेश उनके लिए कोई अहमियत नहीं रखते। भूपेंद्र हुड्डा एक तरफ तो खुद को प्रदेश कांग्रेस की चौधर दिलाने के लिए हाईकमान पर हर तरह का दबाव डालते हैं लेकिन खुद पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से इनकार करते हैं।
वह पार्टी की बेहतरी के बजाय खुद का दबदबा दिखाने के लिए जनक्रांति यात्रा की तैयारियों के लिए तो साथी नेताओं को झोंक रहे हैं लेकिन आज हुए विश्वासघात दिवस प्रदर्शनों में उन्होंने बहुत ही बेरुखी दिखाई है । भूपेंद्र हुड्डा इससे पहले भी कई बार राहुल गांधी के आदेशों की अनदेखी कर चुके हैं।
बार-बार हाईकमान की इस तरह अनदेखी करना यह साबित करता है कि भूपेंद्र हुड्डा पिछली गलतियों से सबक नहीं ले रहे हैं और हाईकमान को नीचा दिखाने का बार-बार काम करते हैं। एक तरफ प्रदेश में जहां इनेलो और बसपा एसवाईएल मुद्दे पर जेल भरो आंदोलन चलाते हुए जनता का भरोसा हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने के राहुल गांधी के प्रयासों का जनाजा निकालने का काम करते हैं। इसका अर्थ यही है कि वह नहीं चाहते कि हरियाणा में प्रदेश कांग्रेस मजबूत हो और उनके बिना वह सत्ता हासिल करें। यही वजह है कि उन्होंने विश्वासघात दिवस प्रदर्शनों में किसी प्रकार की  भागीदारी नहीं की।
भूपेंद्र हुड्डा परिवार जहां एक तरफ लगातार राहुल गांधी की अनदेखी करता रहा है वहीं वह स्वर्गीय राजीव गांधी के बलिदान दिवस को भी महत्वहीन समझता रहा है। 4 दिन पहले राजीव गांधी का 21 मई को बलिदान दिवस था लेकिन भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा या उनके किसी भी समर्थक विधायक या नेता ने राजीव गांधी को श्रद्धा सुमन देने की जहमत नहीं उठाई।
खरी खरी बात यह है कि भूपेंद्र हुड्डा जनक्रांति यात्रा के माध्यम से अपना जनाधार दिखाते हुए हाईकमान पर दबाव बनाना चाहते हैं कि उनके बगैर हरियाणा में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है और अगर पार्टी हाईकमान हरियाणा में सरकार बनाना चाहती है तो उसे पार्टी कमान उसे या उसके चहेते नेता को ही सौंपनी पड़ेगी।
 एक तरफ तो भूपेंद्र हुड्डा दिल्ली के पांच सितारा होटल में राहुल गांधी के साथ संबंध सुधारने का ड्रामा करते हैं तो दूसरी तरफ राहुल गांधी के आदेश को मानने से इनकार करते हैं।ऐसे में भूपेंद्र हुड्डा की कांग्रेस के प्रति वफादारी और निष्ठा पर बड़े सवालिया निशान खड़ा होना जायज लगता है।

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