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ये है भाजपा की A और B टीम

अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा हैं भाजपा के मददगार
 सीबीआई के डर से भाजपा पर नहीं करते कड़े प्रहार
 सिर्फ बयानबाजी करके कर रहे फॉर्मेलिटी पूरी
कुलदीप श्योराण
 चंडीगढ़। पिछले 4 साल के दौरान इनेलो कमांडर अभय चौटाला और कांग्रेस संगठन पर अवैध कब्जाधारी पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा एक दूसरे पर भाजपा की बी टीम होने के आरोप जड़ते आए हैं लेकिन क्या आप जानते हैं यह दोनों ही नेता भाजपा की एक और बी टीम हैंं। यह दोनों नेता जनता के सामने तो एक-दूसरे की जबरदस्त खिलाफत करते हैं मगर अंदरखाते यह दोनों ही भाजपा की खुलकर मदद कर रहे हैं।
जी हां आज खरी-खरी न्यूज़ आपके सामने खुलासा कर रहा है कि अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा  दोनों ही ए और बी टीम के रूप में भाजपा के मददगार नेताओं की भूमिका बखूबी अदा कर रहे हैं ।
भाजपा के साथ भूपेंद्र हुड्डा और अभय चौटाला की मिलीभगत के प्रमाण यह हैं-
-3 साल में 3 बार हरियाणा में भारी उपद्रव होने के बावजूद क्या अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा ने भाजपा सरकार को बेनकाब करने के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ने का काम किया?
-क्या अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा ने डीजल व पेट्रोल के दाम बढ़े दामों को लेकर कोई आंदोलन खड़ा किया है?
-क्या भूपेंद्र हुड्डा और अभय चौटाला ने किसानों की फसलों की बेकद्री और सही दाम नहीं मिलने को लेकर कोई आंदोलन खड़ा किया है?
-क्या अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा ने भाजपा द्वारा हर साल दो लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा पूरा न करने पर कोई आंदोलन खड़ा किया है?
– क्या अभय चौटाला और  भूपेंद्र हुड्डा ने HSSC में हुए भर्ती घोटाले को लेकर सरकार की घेराबंदी करते हुए उसे घुटनों पर झुकने के लिए मजबूर किया?
– क्या अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा ने प्रदेश में चल रहे बेलगाम माइनिंग माफिया के खिलाफ कोई आंदोलन खड़ा किया है?
– क्या किसानों की 2 दिन पहले कम की गई बिजली को लेकर भूपेंद्र हुड्डा या अभय चौटाला ने सरकार को कोई आंदोलन छेड़ने की धमकी दी है ?
 उपरोक्त सभी सवालों का जवाब ना में है।
 आप ही बताइए जब प्रदेश के इन सबसे बड़े मुद्दों पर प्रदेश की 2 सबसे बड़ी पार्टियों के सबसे वजनदार नेता अगर खामोशी धारण किए रहते हैं तो उसका मतलब साफ है कि यह लोग सरकार पर हमला करने की बजाय, उसे सड़कों पर घेरने की बजाय सिर्फ खामोशी धारण किए रहते हैं तो उसका मतलब साफ है कि यह लोग सरकार की पोल खोलने की बजाय उसकी मदद करने का काम कर रहे हैं।
जी हां पिछले 3 साल के दौरान भूपेंद्र हुड्डा ने सिर्फ दो काम किए हैं।
 पहला काम-
 वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने के लिए पार्टी हाईकमान पर हर तरह से दबाव डालने का काम किया। भूपेंद्र हुड्डा ने इसके लिए अपने समर्थक विधायकों और नेताओं को सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास भेजने का काम किया। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली की रैलियों में अपने गुलाबी गैंग के जरिए पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाने का काम किया।
 दूसरा काम-
 भूपेंद्र हुड्डा ने कांग्रेस हाईकमान को अपना जनाधार दिखाने के लिए किसान पंचायतों का आयोजन किया। इन किसान पंचायतों के दो मकसद थे। पहला मकसद पार्टी हाईकमान को यह दिखाना कि हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा के बगैर कांग्रेस के पास कुछ भी नहीं है  और दूसरा मकसद अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को सियासी तौर पर स्थापित करना था। किसान पंचायतों के बावजूद जब भूपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस की कमान नहीं सौंपी गई तो वह अलग पार्टी बनाने की कगार पर पहुंच गए थे मगर कुछ शुभचिंतकों के आईना दिखाने पर उन्होंने अपना इरादा बदलना बेहतर समझा
इसके अलावा भूपेंद्र हुड्डा ने सिर्फ चंडीगढ़ में ही कई बार सरकार के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस तो जरूर की लेकिन जिन मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की उन मुद्दों को लेकर एक बार भी उन्होंने जनता को साथ लेकर बड़ा आंदोलन करने की जहमत नहीं उठाई।
भूपेंद्र हुड्डा हर हाल में पार्टी की चौधर अपने हाथ में लेते हुए अगले चुनाव में CM बनने का ख्वाब रखते हैं। उनके लिए जनता के मुद्दों की अहमियत सिर्फ प्रेस कान्फ्रेंस तक है और अपनी ख्वाहिशों के लिए वह कुछ भी करने का जज्बा रखते हैं। भूपेंद्र हुड्डा को जनता की परेशानियां और जरुरतेंं जहां नजर नहीं आती हैं वही उनको सिर्फ अपने cm बनने की ख्वाहिश और प्रदेश कांग्रेस पर कब्जा करने की चाहत नजर आती है।
 इसी तरह अभय चौटाला ने भी पिछले 3 साल के दौरान सिर्फ दो काम किए।
 पहला काम-
 उन्होंने इनेलो संगठन पर अपने कब्जा मजबूत करने का काम किया। उन्होंने अपने समर्थक नेताओं को जहां अहमियत दी वही उनको पसंद नहीं करने वाले नेताओं को खुडडे लाइन लगाने का काम किया। यह सभी जानते हैं कि अभय चौटाला cm बनने की हसरत रखते हैं और इसीलिए उन्होंने बसपा के साथ गठबंधन करते हुए सत्ता हासिल करने का चक्रव्यूह रचा है। अभय चौटाला जनता के भले के बारे में सोचने के बजाय फिलहाल सिर्फ खुद के सियासी भविष्य के बारे में ज्यादा काम कर रहे हैं।
 दूसरा काम –
उन्होंने खुद को कद्दावर नेता बनाने के लिए एसवाईएल के मरे हुए मुद्दे को उठाने का काम किया। पिछले चार दशक से एसवाईएल का मुद्दा सिर्फ सियासी कमाई का माध्यम बन गया है। अभय चौटाला 2 साल से इस मरे हुए सांप जैसे मुद्दे को उठा कर बेमतलब की राजनीति कर रहे हैं। अभय चौटाला ने अपने समर्थकों से खुद को जल युद्ध नायक के रूप में प्रचारित करने का काम किया और इसको लेकर इस समय जेल भरो आंदोलन भी चला रहे हैं। जनता में इनेलो के इस आंदोलन को लेकर कोई भी सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं है। जनता के लिए जरूरी रोजगार, महंगाई, बिजली के मुद्दों को लेकर अभय चौटाला ने एक बार भी प्रदेश में आंदोलन शुरु करने की कोशिश नहीं की।
 खरी खरी बात यह है कि भूपेंद्र हुड्डा और अभय चौटाला दोनों पर भाजपा ने सीबीआई के जरिए शिकंजा कसा हुआ है। भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मामले सीबीआई के पास जांच के दायरे में चल रहे हैं तो दूसरी तरफ अभय चौटाला भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई कोर्ट के फैसले की दहलीज पर खड़े हैं।
 इन दोनों नेताओं को यह लगता है कि अगर उन्होंने भाजपा के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाते हुए राजनीतिक आंदोलन खड़ा करने का काम किया तो भाजपा उनको उठाकर जेल में डाल देगी। यही कारण है कि यह दोनों नेता भाजपा पर हमलावर होने की वजह सिर्फ कागजी नेताओं का रोल अदा कर रहे हैं।
दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो भरमार लगा देते हैं मगर सड़क पर उतरकर जनता के लिए संघर्ष करने का जज्बा दोनों में कभी नजर नहीं आया है। शायद सीबीआई का डर दोनों को ही भाजपा के साथ सौदेबाजी की राजनीति करने को मजबूर कर गया है। अब आप ही बताइए क्या अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा भाजपा की एक और भी टीम के रूप में काम नहीं कर रहे हैं?

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