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सरकार का किसान विरोधी फैसला 

बिजली के घंटे 8 से घटाकर 5 किए
कुलदीप श्योराण
 चंडीगढ़। खुद को किसानों का बड़ा हितैषी कहने वाली प्रदेश की मनोहर सरकार ने किसानों पर गाज गिरने वाला फैसला किया है। सरकार ने किसानों को मिलने वाली बिजली को 8 घंटे से घटाकर 5 व 6 घंटे कर दिया है। इससे किसानों को सिंचाई में बड़ी परेशानी आने वाली है और इससे फसलों के सूखने का खतरा रहेगा। किसानों को मई और जून के महीनों में ही सिंचाई की सबसे अधिक जरूरत पड़ती है क्योंकि इस समय न तो बरसात होती है और दूसरी तरफ भीषण गर्मी पड़ती है। फसलों को बचाए रखने के लिए किसानों को उन्हें ट्यूबवेलों के जरिए पानी देना पड़ता है।
 बिजली में 25% से अधिक की कटौती करना फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है। एक तरफ प्रदेश सरकार यह दावा करती है कि उसके पास सरप्लस बिजली है जिसे वह दूसरे प्रदेशों को बेचने के लिए तैयार है और दूसरी तरफ वह किसानों के 8 घंटे की बिजली कोटे को भी 5 घंटे करने का गलत फैसला कर गई है।
 इसके साथ-साथ यह भी साफ हो गया है कि सामान्य बिजली उपभोक्ताओं को इस समय सिर्फ साढे 11 घंटे बिजली मिल रही है। सरकार बिजली को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन सरकार का यह नया फैसला उसके जन हितेषी होने की पोल खोलने के अलावा बिजली की वास्तविक दयनीय हालत का बखान कर गया है। सरकार के इस बिजली कम करने का फैसले से किसानों के नाराज होने की पूरी आशंका है और उसके कारण प्रदेश में किसान आंदोलन आरंभ होने के संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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