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चौटाला में देवीलाल को दिखते थे कई खास गुण

ठोक-बजाकर बनाया था देवीलाल ने चौटाला को उत्तराधिकारी

  कुलदीप श्योराण 

चंडीगढ़। प्रदेश की सियासत में  देवीलाल परिवार  सबसे बड़ा कद रखता है। जनता पर गहरी पकड़ के कारण ही  देवीलाल को  जननायक कहा जाता है। 1989 मेंं प्रधानमंत्री पद ठुकरा कर उन्होंने नई मिसाल कायम की थी। उन्होंने अपनीजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी चुनने में बेहद लंबा समय लिया। चारों बेटोंं ओम प्रकाश चौटाला, प्रताप चौटाला, रणजीत सिंह और  जगदीश सभी से वे प्यार करते थे।
 प्रताप चौटाला को उन्होंने सबसे पहले अपनी जगह विधायक बनाया। उसके बाद रणजीत सिंह को भी  विधायक बनाया। ओमप्रकाश चौटाला को भी उन्होंने विधायक बनाया। सबसे छोटे बेटे जगदीश को उनका लाडला माना जाता था मगर व्यक्तिगत कमियोंं के कारण वे सियासत में  शख्सियत नहीं बन पाए।

 देवीलाल ने चारोंं बेटों को हर तरह से परखने के बाद 1990 मेंं ओम प्रकाश चौटाला को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। ओमप्रकाश चौटाला को उत्तराधिकारी घोषित करने से पहले देवीलाल परिवार मेंं तनाव का माहौल था। जनता व कैडर के अलावा विधायकों में रणजीत सिंह cm बनने के पहले दावेदार थे लेकिन देवीलाल ने सबकी अनदेखी करते हुए ओमप्रकाश चौटाला को अपना उत्तराधिकारी बनाया।

 1987 में देवीलाल प्रचंड बहुमत के साथ CM बने थे। उस समय रणजीत सिंह चौटाला उनके सबसे बेहद करीबी होते थे। प्रताप चौटाला के बेटे रवि चौटाला भी देवीलाल के पीएसओ होते थे। 2 साल तक रणजीत सिंह के बेटे और रवि चौटाला ही देवीलाल का सारा तामझाम देखते थे। उस समय ओम प्रकाश चौटाला के परिवार को देवीलाल का कम आशीर्वाद माना जाता था लेकिन 1989 के लोकसभा चुनाव में देवीलाल के उप प्रधानमंत्री बनने के बाद परिवार के राजनीतिक हालात में उलट-पुलट हो गई। हरियाणा की विरासत को संभालने के लिए रणजीत सिंह को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था मगर देवीलाल ने तमाम आकलनों को झुठलाते हुए ओमप्रकाश चौटाला को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। ओमप्रकाश चौटाला को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपने के पीछे स्वर्गीय देवी लाल की खास सोच थी।

 चौटाला को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के पीछे कई कारण थे।

 कारण नंबर 1
 स्वर्गीय देवीलाल परंपरावादी थे। इसलिए उन्होंने अपना उत्तराधिकारी सबसे बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला को बनाना उचित समझा।
 कारण नंबर 2
 स्वर्गीय देवीलाल उस बेटे को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे जो भाषण देने के मामले में जनता को बांधने की कला रखता हो और कैडर को खड़ा करने की क्षमता रखता हो। इन दोनों ही मामलों में ओमप्रकाश चौटाला का कोई सानी नहीं था। इसलिए उत्तराधिकार उन्हीं को हासिल हुआ।
कारणनंबर 3
 स्वर्गीय देवीलाल अपना उत्तराधिकारी उस बेटे को बनाना चाहते थे तो जनता में अधिक-से-अधिक समय रहकर अपना प्रभाव छोड़ने की काबिलियत रखता हो। चारों बेटों में ओम प्रकाश चौटाला ही जनता में सबसे अधिक रहते थे। इसलिए उनको उत्तराधिकारी बनने का अधिकार मिला।
कारण नंबर 4
स्वर्गीय देवीलाल अपना उत्तराधिकारी उस बेटे को बनाना चाहते थे जो कड़क स्वभाव का हो और विरोधियों को निपटाने में किसी तरह का समझौता न करता हो। ओम प्रकाश चौटाला में यह दोनों ही क्वालिटी मौजूद थी। इसलिए स्वर्गीय देवीलाल ने उनको अपने उत्तराधिकार की बागडोर सौंपी।
कारण नंबर 5
 स्वर्गीय देवीलाल अपना उत्तराधिकारी उस बेटे को बनाने के पक्ष में थे जो उनकी तरह धोती कुर्ता और पगड़ी पहनता हो। प्रताप चौटाला, रणजीत सिंह सफारी सूट कल्चर के नेता थे। सिर्फ ओम प्रकाश चौटाला ही धोती पहनते थे। इसलिए देवीलाल ने उन पर ही अपना भरोसा जताया।
कारणनंबर 6 
 देवीलाल का यह मानना था कि सरकार बनाने के लिए पैसों की सबसे अधिक जरूरत होती है। उन्होंने अपने खासमखास को बताया था कि अगर उनके पास पैसे होते तो 1982 में ही वे CM बन जाते।इसलिए वे उस बेटे को पार्टी की बागडोर सौंपना चाहते थे जो पैसे का प्रबंध करने में माहिर हो । प्रताप चौटाला व रणजीत सिंह डील करने में फ्लेक्सिबल रहते थे लेकिन ओम प्रकाश चौटाला इस मामले में स्टैंड के पक्के थे और समझौता नहीं करते थे। 1987 में सरकार बनने के बाद 1990 तक ओम प्रकाश चौटाला ने पैसों के प्रबंधन में दूसरों से कहीं बेहतर कार्य किया जिसके चलते स्वर्गीय देवीलाल को उन्ही में अपना सफल उत्तराधिकारी नजर आया।
कारण नंबर 7
स्वर्गीय देवीलाल का मानना था कि कौम ही किसी शख्स को नेता बनाती है और कौम का नेता वही बनता है जो विचारों में कट्टर होता है। ओमप्रकाश चौटाला को हमेशा कट्टर स्वभाव का माना जाता है। इसीलिए देवीलाल का मानना था कि जाटों का बड़ा नेता बनने के सबसे अधिक गुण ओम प्रकाश चौटाला में हैं और इसीलिए उन्होंने उनको अपना राजनीतिक वारिस बनाया।
कारण नंबर 8
 स्वर्गीय देवीलाल का मानना था कि जनता का नेता बनने के लिए पूरे प्रदेश के सामाजिक व राजनीतिक हालात का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। इस मामले में ओम प्रकाश चौटाला सबसे माहिर थे क्योंकि वह जनता में घुसे रहते थे। इसलिए देवीलाल को लगा कि ओम प्रकाश चोटाला ही उनकी विचारधारा और राजनीतिक विरासत को बरकरार रख सकते हैं।
कारण नंबर 9
 स्वर्गीय देवीलाल की छुपी हुई मंशाओं को पूरा करने का काम हमेशा ओम प्रकाश चौटाला व उनके परिवार ने किया। इस कारण देवीलाल का लगाव धीरे-धीरे ओमप्रकाश चौटाला परिवार के साथ बढ़ता गया और उनको लगा कि यही परिवार आगे चलकर राजनीति में लंबी लकीर खींच सकता है। इसलिए उन्हें ओमप्रकाश चौटाला को अपना उत्तराधिकारी बनाया।
कारण नंबर 10
स्वर्गीय देवीलाल यह मानते थे कि पार्टी और सरकार चलाने के लिए सख्त स्वभाव का होना बहुत जरूरी है। वह कहते थे कि उनकी नरमाई और भलाई का साथी नेताओं ने कई बार बेजा फायदा उठाया और उनके हाथ आई सत्ता को छीन लिया। इसलिए वह अपना उत्तराधिकारी उस बेटे को बनाना चाहते थे जो न केवल पार्टी नेताओं को काबू में रख सके बल्कि अफसरशाही पर भी नकेल डालने का काम कर सकें। इस पैमाने पर सिर्फ ओमप्रकाश चौटाला ही खरे उतरते थे।इसलिए स्वर्गीय देवीलाल ने उनके सिर पर अपना आशीर्वाद का हाथ रखा।
अगली खास खबर- चौटाला परिवार में 31 साल बाद 36 का आंकड़ा

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