भाजपा पर उंगली उठाने का नैतिक अधिकार नहीं 
 दर्जनों सरकारें कांग्रेस ने इन्हीं हथकंडों से बनाई थी
कुलदीप श्योराण
 चंडीगढ़। किस्सा 1982 का है ………
 हरियाणा में चुनाव हुए ।
कांग्रेस का नेतृत्व भजन लाल कर रहे थे ।
उनके मुकाबले में लोकदल ने भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया था ।
Cong को 35 सीट और लोकदल -भाजपा गठबंधन को 37 सीट ( 31 लोकदल और 6 भाजपा ) पर जीत मिली। चौधरी देवी लाल ने 6 निर्दलीय , 3 कांग्रेस (J) , और 1 जनतादल के विधायक का समर्थन जुटा लिया था और अपने विधायकों को लेकर परवाणू के शिवालिक होटल में डेरा डाल लिया । अकाली लीडर प्रकाश सिंह बादल देवीलाल के पक्के दोस्त थे। उनके सैकड़ों समर्थक निहंग हाथों में नंगी तलवारें लिए होटल के बाहर पहरा दे रहे थे ।
उस समय  हरियाणा के राज्यपाल थे जीडी तपासे। तपासे जी ने देवी लाल से कहा कि अपने विधायकों की परेड कराओ । मैं एक एक से अकेले में बात करूंगा । ताऊ देवीलाल अपने विधायकों को बस में भर के राजभवन पहुंच गए। सभी विधायक हाल में बैठा दिए गए । वो सब दो घंटे तक इंतज़ार करते रहे पर गवर्नर बाहर नही आये ।
अंदर कुछ और ही खेल चल रहा था । अंदर राज्यपाल के पास भजनलाल बैठे थे । इंदिरा गांधी के आदेश पर तपासे ने बहुमत रखने वाले देवीलाल की जगह भजन लाल को सीएम बनाने का फैसला कर लिया था। गवर्नर ने एक एक कर विधायकों से मिलना शुरू किया और 11 दलित विधायकों से सौदेबाजी कर कांग्रेस के समर्थन में समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिये ।
उसके बाद अंदर एक कमरे में भजन लाल को पद और गोपनीयता की शपथ दिला दी गयी और उन्हेंं 15 दिन में बहुमत सिद्ध करने का समय दे दिया गया ।मुख्यमंत्री बन भजन लाल राजभवन के पिछले दरवाजे से निकल गए और बाहर हॉल में बैठे देवीलाल को जब ये खबर लगी तो हड़कंप मच गया। देवी लाल और उनके समर्थक भाजपा विधायकों नेताओं ने गवर्नर को घेर लिया और उनका गिरेबान पकड़ लिया। गवर्नर को उनके सुरक्षाकर्मियों ने बमुश्किल बचाया ।
इस घटना क्रम में विधायकों की ऐसी हॉर्स ट्रेडिंग हुई कि भारतीय राजनीति में खरीद फरोख्त के नए रेकॉर्ड बने । दो विधायको गया राम व हीरानंद आर्य ने एक दिन में 3 बार पाला बदला और बाकायदे हर बार गवर्नर को पार्टी बदलने की चिट्ठी लिखी । हरियाणा की इस हॉर्स ट्रेडिंग ने देश में विधायक तोड़ने की मुहिम को आया राम गया राम के नाम से प्रसिद्ध कर दिया।
देवीलाल सारा बहुमत लिये ताकते रह गए और भजन लाल मुख्यमंत्री बना दिये गए ।
उस समय कांग्रेस ने सत्ता के लालच में भारतीय राजनीति को कमीनापन सिखाया।
मज़े की बात कि उनके विरोधियों ने वो सारे गुर , वो सारा कमीनापन सीख लिया है और कांग्रेसियों से बेहतर सीख लिया है । अब अटल -आडवाणी के जमाने की वो भाजपा नहीं रही जो एक वोट से विश्वास मत हार जाती थी ।
आज की भाजपा कांग्रेस के सारे दाव पेंच , सारा कमीनापन सीख के बैठी है । कांग्रेस के पाप उसके सामने आ रहे हैं । कांग्रेस ने 1982 में जोड़-तोड़ कर कर CM बनने वाले भजनलाल की पार्टी लाल के परिवार की पार्टी हजकांं के 5 विधायकों को 2009 में तोड़कर हरियाणा में जिस तरह से अपनी सरकार बनाई थी उसे भी पूरे देश ने सरेआम देखा था।
इसके अलावा भी कांग्रेस ने कई प्रदेशों में सत्ता के बलबूते पर सरकार बनाने का औछे हथकंडों के जरिए काम किया था। आज वही औछे हथकंडे कांग्रेस पर भारी पड़ रहे हैं और यही कारण है कि गोवा, मणिपुर, मेघालय और कर्नाटक में उसको सत्ता से बेदखल कर दिया गया।
आज कांग्रेस जीत संविधान की दुहाई दे रही है, उसी संविधान को उसने एक दर्जन से अधिक बार तार तार करने का काम किया था। उस समय वह सत्ता के नशे में मदहोश होकर सरकारे तोड़ने और सरकारें बनाने का काम करती थी। आज अगर भाजपा उसी पैतरे को आजमा कर सत्ता हासिल कर रही है तो कांग्रेस को उंगली नहीं उठानी चाहिए।

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