Wednesday , November 20 2019
Breaking News
Home / KHARI KHARI NEWS EXCLUSIVE / भाजपा का प्लान हुआ चोपट |

भाजपा का प्लान हुआ चोपट |

 

 

भाजपा के बजाय पहली पसंद बन सकती है बसपा
कुलदीप श्योराण
चंडीगढ़। कल अस्तित्व में आया इनेलो- बसपा का गठबंधन सत्तारूढ़ भाजपा के अरमानों पर भी पानी फेरने का काम कर सकता है। दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा एक सिंपल से फार्मूले पर काम कर रही थी। भाजपा के रणनीतिकारों को यह लगता था कि कांग्रेस में चुनाव लड़ने वाले नेताओं की भारी भीड़ के चलते टिकट हासिल नहीं करने वाले कम से कम तीन दर्जन नेता विधायक बनने की लालसा में उसका दामन थाम सकते हैं।
2014 के विधानसभा चुनावों से पहले भी कांग्रेस के कई बड़े नेता सत्ता का हिस्सेदार बनने की चाहत में भाजपा में शामिल हुए थे। कांग्रेस से भाजपा में गए नेताओं ने ही उसे सत्ता का सप्ताह बनाने में अहम भूमिका निभाई थी । 2019 के चुनाव को लेकर भी भाजपा का यही गणित था कि टिकट हासिल नहीं करने वाले कांग्रेस नेताओं के लिए भाजपा ही एकमात्र विकल्प रहेगा जिसके चलते वह मजबूत चेहरों के बलबूते पर फिर से सत्ता हासिल करने का ख्वाब पूरा कर लेगी।
भाजपा के नेताओं का यह आकलन काफी हद तक सही भी है क्योंकि कांग्रेस में इस समय आधा दर्जन नेताओं के गुटों में सभी सीएम पद की दावेदारी मजबूत करने के लिए जनसभाएं करने की होड़ में लगे हुए हैं।
सबसे अधिक नेता इस समय भूपेंद्र हुड्डा के साथ खड़े हैं। अगर अशोक तंवर प्रदेश अध्यक्ष बने रहते हैं तो हुड्डा खेमे के लगभग तीन दर्जन नेताओं के टिकट नहीं मिलने के साफ आसार नजर आते हैं। भाजपा ने ऐसी सभी सीटों की सूची बना रखी है जहां पर कांग्रेस के पास एक से अधिक मजबूत दावेदार नेता मौजूद हैं।  इन नेताओं में से एक कोई टिकट मिलने पर दूसरे नेताओं के बागी होने के पूरे आसार हैं। इन्हीं बागी नेताओं पर डोरे डाल कर भाजपा दोबारा सत्ता हासिल करने का गेम खेलना चाहती थी।
कांग्रेस में इस समय कालका,पंचकूला,  लाडवा, थानेसर, असंध, पानीपत शहरी, कलायत, गुहला चीका, पुंडरी, समालखा, गन्नौर, खरखोदा, बहादुरगढ़, हांसी, नारनौंद, बरवाला, उकलाना, नलवा, फतेहाबाद, टोहाना, रतिया, बवानीखेड़ा, लोहारू, बाढड़ा, दादरी, भिवानी, नारनोल, बावल, पटौदी, गुडगांव, फरीदाबाद,हथीन,  पृथला व बड़खल सीटों पर एक से अधिक नेता टिकट की दावेदारी ठोक रहे हैं।
इन सभी सीटों पर भाजपा ने नज़र टिकाई हुई है। इनमें से कुछ सीटों पर अभी भाजपा के सेटिंग विधायक भी हैं लेकिन जनता की नाराजगी से बचने के लिए भाजपा कई विधायकों के टिकट काटने पर विचार कर रही है।ऐसे में उन सीटों पर भी भाजपा को चुनाव जिताने वाले नेताओं की तलाश है।
भाजपा नीतिकारों को यह लगता था कि जिन कांग्रेस नेताओं को टिकट नहीं मिलेगी वह इनेलो में जा नहीं सकते और उन हालात में उनके पास सिर्फ भाजपा में आने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा लेकिन इनेलो और बसपा का गठबंधन होने के बाद अब प्रदेश के सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। टिकट हासिल करने वाले नेताओं के लिए भाजपा से बेहतर विकल्प बसपा के रूप में एकदम सामने आया है। बसपा में अभी नेताओं की मारामारी नहीं है।ऐसे में विधायक बनने वाले नेताओं में उसके प्रति आकर्षण बनने में देर नहीं लगेगी। बसपा के प्रति नेताओं में क्रेज पैदा होने पर भाजपा का खेल खराब होने के प्रबल आसार बन जाएंगे।
2014 में भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं के अनुभव खराब होने के चलते दूसरे दलों के नेता भाजपा में शामिल होने से कतरा रहे हैं। ऐसे में इनेलो और बसपा का गठबंधन उनके लिए एक गोल्डन चांस बन कर सामने आ सकता है इस गठबंधन के कारण ही भाजपा की उम्मीदों पर पानी से साफ नजर आ रहा है।
अब दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा रणनीतिकारों को नए सिरे से नई रणनीति बनाकर काम करना होगा तभी वह दोबारा सत्ता हासिल करने का सपना साकार कर पाएगी।फिलहाल तो यह लगता है कि इनेलो और बसपा के गठबंधन ने कांग्रेस का रास्ता रोकने के अलावा भाजपा की राह में भी कांटे बोने का काम कर दिया है।
खरी खरी बात यह है कि इनेलो और बसपा का गठबंधन प्रदेश की राजनीति में बड़ा धमाका करने का काम कर गया है। इस गठबंधन का भाजपा और कांग्रेस दोनों को बराबर का नुकसान होता नजर आ रहा है। इनेलो के ग्राफ में इजाफा नहीं होने के कारण अभी तक उसके सत्ता में आने के दूर-दूर तक कोई आसार नहीं थे लेकिन बसपा के साथ गठबंधन आने के बाद सत्ता की प्रबल दावेदार बन गई है। इस गठबंधन के चलते कांग्रेस की सत्ता हासिल करने की राह कठिन हो गई है क्योंकि जनता के सामने भी एक और मजबूत विकल्प पेश हो गया है। ऐसे में कांग्रेस की बैठे-बिठाए सरकार बनने की अब कोई संभावना नहीं बची है। भाजपा के लिए भी अब दोहरी मार का खतरा पैदा हो गया है।
सरकार से नाराज होने वाली जनता कांग्रेस और इनेलो-बसपा गठबंधन दोनों को अपनी पसंद बनाने का काम कर सकती है जिसके चलते हालात बिगड़ने पर भाजपा दोबारा सत्ता हासिल करने के बजाए सत्ता से बेदखल होकर तीसरे नंबर पर भी जा सकती है।इनेलो और बसपा का गठबंधन कांग्रेस से अधिक भाजपा का खेल बिगाड़ने वाला पहला कारण साबित हो सकता है।

About kharikharinews

Check Also

मेयर के चुनाव करेंगे सियासी उलटफेर/Mayer direct elections going to deciding factor

मेयर के चुनाव करेंगे सियासी उलटफेर सीधे चुनाव का फैसला पड़ सकता है भाजपा पर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *