पूर्ण बहुमत का और कॉन्फिडेंस पड़ गया भारी 

देवेगौड़ा को अनदेखा करना बिगड़ गया सारे समीकरण

कुलदीप श्योराण
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने की दहलीज पर खड़ी भाजपा पर उसी का घमंड भारी पड़ गया है। दोपहर के 12 बजे तक भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के आसार नजर आ रहे थे। उसे 115 से अधिक सीटों पर बढ़त मिली हुई थी और यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वह पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।

 भाजपा के इसी ओवरकॉन्फिडेंस ने उससे एक ब्लंडर मिस्टेक करवा दी। अपने बलबूते पर सरकार बनाने के चक्कर में उसने देवड़ा परिवार को अनदेखा करने का काम कर दिया यह भाजपा की बड़ी सियासी गलती रही जिसके चलते 4 बजे तक कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया।

 बहुमत से 7 सीटें दूर रहने के कारण भाजपा के लिए दूसरी पार्टी की मदद लेना बेहद जरूरी हो गया है लेकिन रुझानों में मिले पूर्ण बहुमत के चक्कर में उसने देवेगौड़ा परिवार से बातचीत करना भी जरूरी नहीं समझा। यही बड़ी गलती उसे भारी पड़ रही है। दूसरी तरफ सोनिया गांधी ने हालात को भांंपते हुए गुलाम नबी आजाद को देवेगौड़ा परिवार के साथ बातचीत में लगा दिया। कांग्रेस ने भाजपा को रोकने के लिए देवेगौड़ा परिवार की जेडीएस को अनकंडीशनल सरकार बनाने का समर्थन दे दिया।

इस कारण कर्नाटक में सत्ता के समीकरण बदल गए और भाजपा के हाथ में आ रही सत्ता की कुर्सी चंद कदम दूर रह गई। केवल दो निर्दलीय प्रत्याशियों के कारण भाजपा का बहुमत हासिल करने का सपना चकनाचूर हो गया और उसे अब कोई और हथकंडा अपनाकर बहुमत हासिल करने का लक्ष्य हासिल करना होगा ।

चुनाव परिणाम आने से पहले कल तक यह अनुमान लगाया जा रहा था कि त्रिशंकु विधानसभा रहने पर भाजपा देवेगौड़ा से समर्थन लेकर सरकार बनाने का काम करेगी। जेडीएस प्रमुख कुमार स्वामी के भाजपा के प्रति सोफ्ट बयानों के कारण यह संभावना मजबूती हासिल भी कर रही थी लेकिन आज भाजपा ने वही गलती कर दी जो कुछ महीने पहले कांग्रेस ने गोवा में की थी।

 गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें मिली थी और उसे लगता था कि वह अन्य विधायकों के साथ मिलकर आराम से सरकार बना लेगी। इसी गलतफहमी में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह राज्यपाल के पास विधायकों की सूची ले जाने की बजाए होटल में आराम फरमाते रहे। उनकी लापरवाही का फायदा उठाते हुए भाजपा ने विधायकों में जोरदार तोड़फोड़ करते हुए बहुमत का आंकड़ा जुटाकर राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया जिसके कारण कांग्रेस गोवा में सत्ता से वंचित रह गई और भाजपा कम सीटों के बावजूद सत्ता की सरताज बन गई।

इसी तरह की कहानी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी आज दोहराई गई।  त्रिशंकु विधानसभा के बनने पर भाजपा जेडीएस के समर्थन से सरकार बनाने की राह पर आगे बढ़ती दिख रही थी लेकिन आज 12 बजे जब रुझानों में भाजपा अकेले बलबूते पर सरकार बनाती नजर आई तो भाजपा नेताओं ने जेडीएस प्रमुख देवेगौड़ा परिवार को पूरी तरह अनदेखा कर दिया और अपनी सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गई। दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपनी सरकार नहीं बनते देख चुनाव परिणाम पूरे घोषित होने से पहले ही देवेगौड़ा परिवार के साथ सेटिंग कर ली और जीडीएस का मुख्यमंत्री स्वीकारते हुए अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया।

कांग्रेस और जीडीएस के विधायक मिलकर 116 हो गए जो बहुमत से छह ज्यादा बनते हैं। इनके अलावा दो अन्य विधायकों ने भी गठबंधन को समर्थन दे दिया जिसके चलते गठबंधन सत्ता का पहला दावेदार बन गया जबकि भाजपा के विधायकों की सूची 104 पर अटक गई और वह राज्यपाल से सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का न्योता देने की फरियाद कर रही है। राज्यपाल के भाजपा से संबंधित होने के कारण भाजपा को सरकार बनाने का न्योता मिलने के पूरे आसार हैं लेकिन यह साफ है कि उसके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं है। भाजपा नेताओं ने और ओवरकॉन्फिडेंस और घमंड के चलते देवेगौड़ा परिवार को अनदेखा करने का काम किया जिसके चलते आराम से बनने वाली उनकी सरकार खतरे में पड़ गई और उनको राजनीतिक जोड़-तोड़ और हथकंडों की सरकार बनाने का काम करना पड़ रहा है।

 खरी खरी बात यह है कि भाजपा किसी भी कीमत पर कर्नाटक में सरकार बनाकर रहेगी। इससे पहले गोवा, मणिपुर और दूसरे राज्यों में भाजपा ने हर हथकंडा बनाते हुए अपनी सरकार बनाने का काम किया है। कर्नाटक में भी वह इसी फार्मूले पर चलते हुए अपनी सरकार कायम करेगी और बाद में बहुमत का जुगाड़ कर लेगी। यह सही है कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है लेकिन यह भी सही है कि कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन बहुमत के साथ सत्ता की दावेदारी कर रहे हैं ।

राजनीतिक नैतिकता के हिसाब से तो कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने का बुलावा मिलना चाहिए मगर राजनीतिक ट्रैंडों का इतिहास यह बताता है कि भाजपा की सरकार बिना बहुमत के बनेगी और बाद में जोड़-तोड़ करके बहुमत का आंकड़ा हासिल करके सरकार को स्थाई मान्यता दे दी जाएगी। भाजपा सरकार बनाने में जरूर सफल होने जा रही है मगर नैतिकता के पैमाने पर वह खोट वाली पार्टी ही साबित होती जा रही है। अगर वह देवेगौड़ा परिवार को समय रहते संभाल लेती तो उसे इस तरह गलत तरीके से सरकार बनाने को मजबूर नहीं होना पड़ता।

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