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सड़कों पर मेरिट वाले यमदूत 

ईमानदार भर्ती की खुल रही पोल
 
20 फिसदी रोडवेज ड्राइवरों के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा 
फर्जी अनुभव और फर्जी दस्तावेज पकड़े जाने के बावजूद करवा दिया ज्वाइन
कलर ब्लाइंड भी चला रहे हैं रोडवेज की बसें
ड्राइवर फर्जी अनुभव फर्जी सर्टिफिकेट की भरमार
फर्जी रोडवेज ड्राइवर कर रहे धड़ाधड़ एक्सीडेंट
कुलदीप श्योराण /असीम राव 
चंडीगढ़/ नारनौल/जींद/ करनाल। प्रदेश सरकार के फेयर भर्ती के दावों की पोल खुलती जा रही है। सरकार ने दावा किया था कि रोडवेज ड्राइवर भर्ती मामले में पूरी पारदर्शिता बरती गई है और मेरिट के आधार पर नौकरियां दी गई है लेकिन नियुक्तियों के 1 महीने के अंदर ही मेरिट का पर्दाफाश होता जा रहा है।
 पिछले 1 महीने में रोडवेज बसों के एक्सीडेंट में 50 फिसदी से ज्यादा का इजाफा हो गया है। 90 फिसदी एक्सीडेंट नए रंगरूट ड्राइवर कर रहे हैं। नारनोल में तो 3 रोडवेज बसों ने आपस में ही टक्कर दे मारी।प्रदेश के इतिहास में पहली बार तीन रोडवेज बसों का आपस में एक्सीडेंट देखने को मिला है। नारनोल के 3 बसों के एक्सीडेंट से यह साफ हो गया है कि भर्ती किए गए ड्राइवरों को बस चलाने का कोई अनुभव नहीं है।
फर्जी अनुभव और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ड्राइवर भर्ती किए गए हैं। नारनौल में तीनों बसों के ड्राइवर नवनियुक्त ड्राईवर थे। इसके अलावा जींद में भी आधा दर्जन नए ड्राइवर बसों के एक्सीडेंट कर चुके हैं। ऐसा ही मामला करनाल में भी उजागर हुआ है ।
जींद में रोडवेज कार्यालय के दस्तावेज बताते हैं कि
-कलर ब्लाइंड को भी नौकरी ज्वाइन करा दी गई ।
—दस्तावेजों की वेरिफिकेशन में अनुभव के समय में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
 -अनुभव प्रमाण पत्रों में भी फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।लेकिन इसके बावजूद उन लोगों को कंडीशनल आधार पर ज्वाइनिंग करा दी गई जबकि इसकी बजाय फर्जीवाड़ा करने वाले ड्राइवरों के खिलाफ केस दर्ज होने चाहिए थे। लेकिन अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा करने वाले ड्राइवरों को जेल का रास्ता दिखाने की बजाए बसों की ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया है ।
फर्जी अनुभव वाले ड्राइवर सवारियों को मौत के मुंह में पहुंचाने का ही काम करेंगे। नारनौल में हुए एक्सीडेंट में एक ड्राइवर जहां खुद मौत का शिकार हो गया वही 20 से अधिक लोगों को गहरी चोट आई।करनाल में भी रोडवेज बस ने एक ट्रैक्टर के परखच्चे उड़ा दिए जिसमें 2 लोगों की मृत्यु हो गई और 10 से अधिक घायल हो गए।
 नवनियुक्त ड्राइवरों की परफॉर्मेंस यह बता रही है कि उनमें से काफी को बस चलानी नहीं आती है और उनके हाथों में स्टेरिंग देकर सरकार ने मौत के हयमदूतों को सड़कों पर उतार दिया है। ड्राइवर भर्ती मामले में सरकार के फिर भर्ती के दावे तार-तार हो गए हैं क्योंकि पता चला है कि 15 से 20 फ़ीसदी ड्राइवरों के दस्तावेजों और अनुभव के समय में फर्जीवाड़ा है ।इन फर्जीवाड़ा करने वाले ड्राइवरों को बाहर का रास्ता दिखाने की बजाय उनको चोर दरवाजे से अपनी गलतियां ठीक करने का मौका दिया गया है जो जो सरकार की खोटी मंशा की पोल खोलने के लिए काफी है। बस ड्राइवर भर्ती मामले में मेरिट के नाम पर पूरी तरह से फर्जीवाड़ा किया गया है और उसमें से सैकड़ों ड्राइवरों को सिर्फ सिफारिश और पहुंच के आधार पर नौकरी देने का काम किया गया है। यह भर्ती पूरी तरह फर्जीवाड़े पर आधारित “ईमानदार” भर्ती है। नकली लाइसेंस, नकली चालक, नकली सर्टिफिकेट वाले बहुत से ड्राइवर एक फर्जी ड्राइवर प्रोफिशिएंसी टेस्ट को देकर भर्ती हुए थे। फर्जी ड्राइवरों की भर्ती जनता की जिंदगी ऊपर भारी पड़नी शुरू हो गई है क्योंकि यह बन्दर के हाथ मे पकड़ाया हुआ उस्तरा है जो न जाने किस किस को काटेगा।

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