भाजपा में शामिल होने की तैयारी 
कुलदीप श्योराण

 चंडीगढ़। पूर्व सांसद अरविंद शर्मा कुछ ही समय बाद भाजपा में शामिल हो चुके हैं हो सकते हैं। इस बारे में उनकी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात भी हो चुकी है। CM ने भी उनके भाजपा में प्रवेश को लेकर हरी झंडी दिखा दी है। संभावना है कि आगामी कुछ दिनों में वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

सोनीपत से निर्दलीय चुनाव लड़ कर सांसद बनने वाले और उसके बाद करनाल से कांग्रेस के टिकट पर सांसद निर्वाचित होने वाले अरविंद शर्मा दोबारा खुद को प्रदेश की सियासत में फ्रंट लाइन में स्थापित करना चाहते हैं। अरविंद शर्मा 2014 के लोकसभा चुनाव में करनाल सीट पर भाजपा प्रत्याशी अश्विनी कुमार चोपड़ा से चुनाव हार जाने के बाद कांग्रेस छोड़कर BSP में शामिल हो गए थे।

 बसपा ने उन्हें विधानसभा चुनाव में CM प्रोजेक्ट किया था। लेकिन बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था और वह खुद भी दोनों जगह चुनाव हार गए थे। उसके कुछ समय बाद उन्होंने बसपा भी छोड़ दी थी। पिछले 3 साल से वे  चुप्पी साधे हुए थे। लोकसभा चुनाव को देखते हुए फिर से चुनावी राजनीति में जीत का चौका मारने की फिराक में हैं।

उन्होंने कुछ महीने पहले कांग्रेस में शामिल होने की कोशिश की थी पानीपत के कार्यक्रम में उन्होंने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की जमकर तारीफ भी की थी जिससे यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।  लेकिन उनकी इंट्री में दूसरे ब्राह्मण नेता कुलदीप शर्मा ने अड़ंगा लगा दिया था।। कुलदीप शर्मा खुद को प्रदेश में कांग्रेस का सबसे बड़ा ब्राह्मण नेता बनाए रखना चाहते हैं। वह जानते हैं कि अगर अरविंद शर्मा दोबारा कांग्रेस में आ गए तो अपनी कलाकारी के बलबूते पर हुए उनसे आगे निकल सकते हैं।  कांग्रेस ने अपनी बात बनते नहीं देख अरविंद शर्मा भाजपा के दरवाजे पर खड़े नजर आ रहे हैं।

क्यों शामिल होंगे भाजपा में?
 करनाल लोकसभा सीट से भाजपा के वर्तमान सांसद अश्वनी कुमार चोपड़ा की टिकट कटने के के आसार नजर आ रहे हैं। अश्विनी कुमार चोपड़ा की जगह भाजपा के पास कोई दमदार चेहरा नहीं है।  इसलिए अरविंद शर्मा को यह लगता है कि भाजपा को टिकट देगी तो आराम से चुनाव जीत जाएंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करनाल सीट साढे तीन लाख वोटों से अधिक से अंतर से जीती थी।
 इसलिए अरविंद शर्मा को यह अपने लिए परफेक्ट सीट लगती है और उनको भरोसा है कि नरेंद्र मोदी के नाम पर उनको जमकर वोट मिलेंगे और वह सांसद बनने सफल हो जाएंगे। भाजपा में इंट्री को लेकर उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात हो चुकी है और उनके भाजपा में जॉइनिंग के लिए सिर्फ तारीख तय करने का काम बाकी है।
भाजपा में कौन-कौन हैं दावेदार ?
वर्तमान सांसद अश्विनी कुमार चोपड़ा की टिकट करने के हालात में भाजपा में तीन मुख्य दावेदार नजर आते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ID स्वामी, पूर्व मंत्री शशि पाल मेहता व शुगर फेड के वर्तमान चेयरमैन चंद्रप्रकाश कथूरिया।
 अगर भाजपा किसी ब्राह्मण नेता को टिकट देने की का फैसला करेगी तो वर्तमान नेताओं में ID स्वामी ही दावेदार हैं। लेकिन आई डी स्वामी की उम्र काफी हो चुकी है और वह भाजपा की 75 साल की रिटायरमेंट पॉलिसी के अंदर शामिल हो चुके हैं। कुछ दिन पहले आईडी स्वामी भाजपा से नाराज हो गए थे और उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर से भी खास मुलाकात की थी। इस मुलाकात से भाजपा में हड़कंप मच गया था। मुख्यमंत्री का जिला होने के कारण स्वामी को तुरंत मनाने का काम किया गया। उम्र के लफड़े कारण ID स्वामी को टिकट नहीं मिलेगी जिसके कारण अरविंद शर्मा टिकट हासिल कर सकते हैं।
 अगर भाजपा ने वर्तमान पंजाबी सांसद अश्विनी कुमार चोपड़ा की जगह पंजाबी नेता को टिकट देने का फैसला किया तो शशिपाल मेहता भी उम्र और सक्रियता के आधार पर पीछे रह जाएंगे। उनकी जगह चंद्रप्रकाश कथूरिया पहले दावेदार साबित हो सकते हैं।  चंद्रप्रकाश कथूरिया पिछले काफी समय से लगातार भाजपा की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। पिछली बार भी वह टिकट के मजबूत दावेदार थे मगर अपने रसूख के बलबूते पर अश्विनी कुमार चोपड़ा हाईकमान से टिकट लेकर पैराशूट से करनाल में उतर गए थे। इस बार अगर टिकट कटी तो पहले दावेदारी पंजाबी नेता के रूप में चंद्रप्रकाश कथूरिया की ही होगी।
क्या है सियासी हालात 
करनाल लोकसभा सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का जिला होने के कारण भाजपा इस सीट को हर हाल में जीतना चाहेगी। वर्तमान सांसद अश्विनी कुमार चोपड़ा की लोकप्रियता में काफी गिरावट देखने को मिली है। जनता में उनके प्रति नकारात्मक भावनाओं के चलते भाजपा उनको टिकट देने का रिस्क नहीं लेगी। अगर भाजपा में उनकी प्रेशर पॉलिटिक्स के चलते उन्हें या उनकी पत्नी को लोकसभा के टिकट दी तो भाजपा के लिए यहां पर जीत दर्ज करना बहुत मुश्किल रहेगा। इस कारण भाजपा उनको राज्यसभा में भेजकर यहां पर किसी स्थानीय चेहरे को टिकट देने का फैसला कर सकती है । यह भाजपा के लिए सबसे बेहतर भी रहेगा।
 करनाल को कांग्रेस ने ब्राह्मण सीट के रूप में प्रचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जबकि 13 लाख वोटरों में ब्राह्मण वोटरों की संख्या सवा लाख से कम है। सिर्फ 10 फिसदी वोटरों के बावजूद करनाल सीट को ब्राह्मण सीट का दर्जा अन्य वोटरों के साथ नाइंसाफी है। इस सीट पर कई बार चिरंजीलाल शर्मा विजयी रहे और उसके बाद अरविंद शर्मा भी यहां जीत दर्ज करने में सफल रहे । लेकिन अश्विनी कुमार चोपड़ा ने पिछले चुनाव में अरविंद शर्मा को भारी मतों से हराकर यह साबित कर दिया था कि इस सीट पर ब्राह्मणों का कोई दावा नहीं है ।
 क्या है वोटर समीकरण
 करनाल सांसद सीट पर सबसे अधिक जाट वोटर हैं जिनकी संख्या लगभग दो लाख है।
दलित वोटर 2 लाख हैं।
जाट सिख वोटरों की संख्या  75 हजार है।
 सवा लाख के करीब ब्राह्मण वोट हैं।
 एक लाख 40 हजार पंजाबी वोटर हैं।
70 हजार रोड वोटर हैं,
65 हजार कश्यप वोटर हैं।
50 हजार बनिया वोटर है।
50 हजार राजपूत वोटर हैं।
50 हजार गुर्जर वोटर है।
20 हजार कंबोज वोटर हैं।
 खरी खरी बात यह है कि अरविंद शर्मा प्रदेश के उन नेताओं में शामिल हैं जो हवा के अनुसार पाला बदलने का काम करते हैं। पिछले चुनाव में बसपा में जाने का उनका फैसला सही साबित नहीं हुआ जिसके चलते उनकी सियासत हाशिए पर चली गई । वह  भाजपा में शामिल होकर दोबारा अपने नाम का डंका बजाना चाहते हैं।
 प्रधानमंत्री मोदी के नाम और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का जिला होने के कारण भाजपा करनाल संसदीय सीट पर मुख्य मुकाबले में रहेगी। इस कारण अरविंद शर्मा का भाजपा में शामिल होने का फैसला उनके लिए सही साबित भी हो सकता है। अगर रमेश कौशिक ने सोनीपत संसदीय सीट पर चुनाव लड़ने से इनकार किया तो अरविंद शर्मा करनाल की बजाय सोनीपत से भी भाजपा के लिए मजबूत विकल्प हो सकते हैं।
 भाजपा के पास इस समय करनाल लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कोई मजबूत चेहरा नहीं है । अरविंद शर्मा उसकी इस जरूरत को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। दोनों की जरूरतें मैच करने के कारण ही अरविंद शर्मा के भाजपा में शामिल होने के आसार बन रहे हैं। अब देखना यह है कि भाजपा और अरविंद शर्मा के अरमानों का मेल मिलाप भविष्य में क्या गुल खिलाता है।

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