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दोबारा cm बनने के सवाल पर लगाए ठहाके 
कुलदीप श्योराण 
चंडीगढ़। खेल मंत्री अनिल विज के अनोखे व्यवहार के किस्से जगजाहिर हैं। उनके खट्टर के साथ रिश्तो की मिठास भी किसी से छुपी नहीं हुई है।वह मौका मिलते ही CM मनोहर लाल खट्टर पर कटाक्ष करने से नहीं चूकते हैं। अनिल विज को लगता है कि या तो अगली बार भाजपा की सरकार नहीं आएगी और आएगी तो मनोहर लाल खट्टर किसी भी सूरत में CM नहीं बनेंगे।

 पत्रकारों ने जब उनसे उनके ऑफिस में मनोहर लाल खट्टर के अगली बार चुनाव के बाद cm बनने की संभावनाओं के बारे में पूछा तो अनिल विज काफी समय तक ठहाके ही लगाते रहे।एक तरह से उन्होंने मनोहर लाल खट्टर के दोबारा CM बनने की बात पर मजाक उड़ाया। उन्होंने यह दिखाया कि खट्टर के दोबारा CM बनने की बात कहना चुटकुले के समान है।  अनिल विज का यह  व्यवहार सभी पत्रकारों को चौंकाने का काम कर गया। अनिल विज के ठहाके इस बात के प्रतीक है कि उनको नहीं लगता कि खट्टर किसी भी सूरत में दोबारा CM बन पाएंगे या फिर उनको यह लगता है कि भाजपा दोबारा सत्ता में नहीं आ पाएगी।

 पत्रकारों के सवाल के जवाब में विज के ठहाके यह इशारा कर गए कि भाजपा की जीत के आसार उनके ही नेताओं के नजर में बेहद कम है। खट्टर के नाम पर अनिल विज के ठहाके इस बात को साबित करते हैं कि पार्टी के दावों के विपरीत सीनियर नेताओं की सोच बिल्कुल अलग है।

जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रोहतक में यह स्वयं ऐलान कर चुके हैं कि अगले चुनाव में भाजपा की अगुवाई मनोहर लाल खट्टर ही करेंगे और वही CM बनेंगे,,वही अनिल विज की बेलगाम हंसी उनकी दावेदारी की खिल्ली उड़ाने का काम कर गई। लगता है कि भाजपा भी कांग्रेस की तरह खेमेबाजी की बीमारी होने की तरफ अग्रसर हो चुकी है। विज का खट्टर की दावेदारी पर खिल्ली उड़ाना यह जाहिर करता है कि अगली बार उनके cm बनने के आसार नहीं है। यह तो वही बेहतर बता सकते हैं कि अगली बार भाजपा की सरकार बनने की संभावना नहीं है या फिर खट्टर के cm बनने के कोई चांस नहीं हैंं।

खरी खरी बात यह है कि खेल मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच शुरू से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है। दोनों के पंजाबी समुदाय से संबंधित होने के कारण पंजाबी समुदाय का सबसे बड़ा नेता बनने की दौड़ के चलते दोनों नेताओं में संबंध कभी भी मधुर नहीं हो पाए।
 मनोहर लाल खट्टर के शपथ ग्रहण करने के पहले दिन से लेकर आज तक के साढे तीन साल के दौरान खट्टर और विज के बीच मतभेद की राजनीति लगातार देखने को मिली है।अनिल विज है हरगिज़ नहीं चाहते कि मनोहर लाल खट्टर cm पद पर बने रहें। दूसरी तरफ मनोहरलाल भी यह नहीं चाहते कि अनिल विज उनके विकल्प के रूप में पार्टी हाईकमान के सामने मजबूत दावेदारी पेश करें। इसलिए दोनों नेता एक दूसरे को काटने के चक्कर में लगे रहते हैं। अनिल विज का खट्टर की अगली दावेदारी पर कटाक्ष करना कहीं ना कहीं भाजपा और खट्टर दोनों के लिए भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा करने का काम कर गया है।

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