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हरियाणा कांग्रेस में चौधर का टारगेट बदला/Fighting scene changed in Haryana Congress

हरियाणा कांग्रेस में चौधर का टारगेट बदला
अध्यक्ष की बजाय cm पद के लिए बिछने लगी बिसात
 हुड्डा का हो नहीं रहा बेड़ा पार
 तंवर की कायम है ललकार
 रणदीप पकड़ रहे रफ्तार
 कुलदीप का लंबा हुअा इंतजार
 कुलदीप श्योराण 
चंडीगढ़ । प्रदेश कांग्रेस में चौधरी के लिए मचे बड़े घमासान के बीच बड़े कांग्रेसी नेताओं का मिशन चेंज हो गया है। लोकसभा चुनाव की आहट पाते ही अब सभी एक दर्जन बड़े नेता अध्यक्ष पद की बजाय cm बनने की बिसात बिछाने लगे हैं।
तंवर विरोधी तमाम नेताओं को यह लगने लगा है कि वह उनको अध्यक्ष पद से हटाने के चक्कर में खुद का नुकसान कर रहे हैं और cm पद की दौड़ को अनदेखा करने की गलती कर रहे हैं। कांग्रेस में पिछले 1 सप्ताह के हालात बता रहे हैं कि तंवर के अलावा सभी नेताओं ने अपनी रणनीति बदल दी है।
हुड्डा का हो नहीं रहा बेड़ा पार 
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की प्रेशर पॉलिटिक्स दम तोड़ती नजर आ रही है। उनकीे जन क्रांति रथ यात्रा का छठा दौर 9 तारीख को  कुरुक्षेत्र जिले में आरंभ हुआ।
इससे पहले वे पलवल, मेवात, पानीपत, फतेहाबाद, महेंद्रगढ़ जिलों में जन क्रांति रथ यात्रा निकाल चुके हैं। भूपेंद्र हुड्डा ने पार्टी हाईकमान पर दबाव डालने के लिए जन क्रांति रथ यात्रा का एलान किया था।
वह यह दिखाना चाहते थे कि प्रदेश कांग्रेस के अधिकांश नेता जहां उनके साथ है वही प्रदेश की जनता में भी उनकी सबसे अधिक पैेठ है । हुड्डा परिवार ने सभी जिलों में आयोजित रैलियों को सफल बनाने के लिए दिन रात एक किया लेकिन उनकी जन क्रांति रथ यात्रा राहुल गांधी पर कोई भी दबाव डालने में नाकाम रही।
 6 चरणों की रथयात्रा के बाद भी जब राहुल गांधी पर हुड्डा की प्रेशर पॉलिटिक्स काम नहीं आई तो पिहोवा में उन्होंने यह घोषणा कर दी कि वह दिसंबर में बहुत विशाल रैली का आयोजन करेंगे।
 दिसंबर की  रैली भूपेंद्र हुड्डा का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने व खुद प्रदेश कांग्रेस की चौधर हासिल करने का अंतिम प्रयास माना जा रहा है। भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों का भी मानना है कि अगर वह प्रदेश कांग्रेस की चौधर हासिल करने में नाकाम रहे तो CM की दौड़ से भी बाहर हो जाएंगे।
तंवर को हटाने के सारे हथकंडे फेल होने के बावजूद भूपेंद्र हुड्डा हार मानने को तैयार नहीं है और वह प्रेशर पॉलिटिक्स के बलबूते पर हाईकमान को झुकाने की हसरत रखते हैं।
उनका नारा “हुड्डा नहीं झुकेगा- रथ नहीं रुकेगा” फेल होता नजर आ रहा है और प्रदेश कांग्रेस की चौधर हासिल करने के उनके मंसूबे पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं। राहुल गांधी की नापसंदगी के चलते भूपेंद्र हुड्डा के अरमानों की किश्ती का बेड़ा पार नहीं हो रहा है ।
तंवर की ललकार बरकरार 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर भूपेंद्र हुड्डा की प्रेशर  पॉलिटिक्स की परवाह व दूसरे दावेदार नेताओं की चिंता किए बगैर अपनी ही धुन में लगातार आगे बढ़ रहे हैं ।
प्रदेश कांग्रेस में सबसे अधिक कार्यक्रम अशोक तंवर के ही चल रहे हैं।। वह हर सुबह पार्टी के लिए पार्टी के प्रति अपना फर्ज निभाने के काम में निकल जाते हैं और रात को वापस लौटते हैं। उनका बहाया गया पसीना ही उनको विरोधी नेताओं की मार से बचाने के लिए कवच का काम कर रहा है ।
अशोक तंवर 12 तारीख से फरीदाबाद से पलवल जिलों में पांच दिवसीय साइकिल यात्रा पर निकल रहे हैं। यह हरियाणा बचाओ परिवर्तन लाओ साइकिल यात्रा का पांचवा चरण होगा। अशोक तंवर ने सीमित साथी नेताओं व सीमित संसाधनों के बावजूद भूपेंद्र हुड्डा की रथ यात्रा को बराबर की टक्कर देने का काम किया है ।
अशोक तंवर को हटाने के लिए जहां सभी बड़े नेता कोशिशें कर रहे हैं वहीं वे अंगद की तरह अपनी जगह पर बने हुए हैं। राहुल गांधी के आशीर्वाद के बदौलत अशोक तंवर लगातार बरकत करने में सफल हो रहे हैं । धीरे-धीरे उनका काफिला भी मजबूत होता जा रहा है।
कांग्रेस हाईकमान का माहौल इशारा कर रहा है कि लोकसभा चुनाव अशोक तंवर की अगुवाई में ही लड़े जा सकते हैं ।
रणदीप की बढ़ी रफ्तार 
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला किस राशि रफ्तार बहुत तेज हो गई है। वह सप्ताह में 2 जनसभाएं करके अपने जनाधार और उत्तर को लगातार बढ़ाने का काम कर रहे हैं ।
 कोर कमेटी में शामिल होने के बाद रणदीप सुरजेवाला के रसूख में बड़ी छलांग नजर आई है । प्रदेश कांग्रेस के काफी नेता उनके साथ संबंधों को मजबूत करना जरूरी मानने लगे हैं।
रणदीप सुरजेवाला की बढ़ती हुई रफ्तार पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है क्योंकि अगर रणदीप सुरजेवाला का सियासी कद बढ़ता है तो वह हुड्डा परिवार के लिए नुकसानदायक साबित होगा।
जाट पॉलिटिक्स में रणदीप सुरजेवाला का बढ़ता हुआ कद हुड्डा परिवार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। रणदीप सुरजेवाला विरोध की राजनीति किए बगैर अपने जनाधार की लंबी लकीर खींचने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं और इसका फायदा उन्हें मिलता हुआ नजर आ रहा है ।
कुलदीप का लंबा हुआ इंतजार 
कांग्रेस राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य कुलदीप बिश्नोई का प्रदेश अध्यक्ष बनने का इंतजार उम्मीद से ज्यादा लंबा खिंच गया है। उनके समर्थकों को यह लगता था कि अगस्त के अंतिम सप्ताह तक उनके नेता को हाईकमान प्रदेश कांग्रेस की चौधर का तोहफा दे देगा लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। कुलदीप बिश्नोई सियासी हालात को बांटते हुए अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। उन्होंने 9 तारीख को हांसी में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया । जनसभा में लोगों की भारी संख्या की मौजूदगी उनका उत्साह बढ़ाने का काम कर गए। कुलदीप कुलदीप बिश्नोई के लिए हिसार संसदीय क्षेत्र में जीत हासिल करना आर- पार का सवाल लेकर आ रहा है । इसलिए उन्होंने समझदारी दिखाते हुए अध्यक्ष की ताजपोशी का इंतजार छोड़कर फिल्ड में सक्रिय होना ही बेहतर समझा। कुलदीप बिश्नोई के लिए सियासी भविष्य के लिए चौधर का सवाल निर्णायक साबित रहेगा।
 खरी खरी बात यह है कि लोकसभा चुनाव के दिसंबर में होने के संकेत मिलने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में बेचैनी का आलम पसर गया है ।
पूर्व सीएम हुड्डा, अशोक तंवर, रणदीप सुरजेवाला, कुलदीप बिश्नोई, कुमारी शैलजा और किरण चौधरी सभी cm बनने की हसरत रखते हैं और इसीलिए इन सभी नेताओं ने अध्यक्ष पद की बजाय CM की कुर्सी हासिल करने को मुख्य टारगेट बनाते हुए अपने सियासी प्लानिंग को अमलीजामा पहनाने का काम कर दिया है ।
कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की अबूझ सोच के चलते प्रदेश कांग्रेस की चौधर का फैसला अधर में लटक गया है जिसके फायदा सिर्फ अशोक तवर को हो रहा है और बाकी नेताओं को मझधार में फंसने का आभास हो रहा है ।
रणदीप सुरजेवाला इस चक्कर में पड़े बगैर ‘ताकत’ की सियासत को लगातार मजबूती देने का काम कर रहे है। गांधी परिवार से नजदीकी का फायदा उठाते हुए वह सीधा बड़ा तोहफा हासिल करने की उम्मीद रखते हैं ।
कांग्रेस के मौजूदा हालात में अशोक तंवर और रणदीप सुरजेवाला जहां लगातार फायदा उठा रहे हैं, वही भूपेंद्र हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई को इंतजार के मुश्किल दौर से गुजर ना पड़ रहा है। कुमारी शैलजा और किरण चौधरी भी दौड़ में शामिल होने की हसरत रखती हैं ।ऐसे में राहुल गांधी का फैसला ही यह तय करेगा कि बहुमत हासिल करने के हालात में सत्ता का सरताज कौन होगा।

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