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सैनी होंगे भाजपा के लिए भस्मासुर साबित /Saini’s Party going costly 4 BJP

सैनी होंगे भाजपा के लिए भस्मासुर साबित 
खुली छूट देने के कारण सैनी में आई अलग पार्टी बनाने की ताकत
एक-एक वोट भाजपा को पहुंचाएगा चुनावी नुकसान 
कुलदीप श्योराण 
चंडीगढ़। कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी 2 सितंबर को पानीपत में अपनी अलग पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का गठन करने जा रहे हैं। इस नई पार्टी का प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर पर पड़ने वाले असर के बारे में अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन भाजपा पर इसका 100 फीसदी जरूर पड़ता नजर आएगा।
 राजकुमार सैनी भाजपा के लिए भस्मासुर साबित होंगे और उनकी पार्टी को मिलने वाला एक-एक वोट भाजपा के खाते से ही निकल कर आएगा ।
भाजपा ने की बड़ी गलती
 भाजपा ने राजकुमार सैनी को कुछ भी बोलने की खुली छूट देकर अपने पैरों पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारने का काम किया।
 राजकुमार सैनी के भड़काऊ बयानों ने जहां प्रदेश के भाईचारे को बिगाड़ने का काम किया वहीं दूसरी तरफ भाजपा के प्रति भी शक का माहौल पैदा किया।
भाजपा द्वारा प्रोजेक्ट किए जाने और भाजपा का ही सांसद होने के बावजूद राजकुमार सैनी पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर भड़काऊ बयान देते रहे और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की खाई गहरी करते रहे लेकिन भाजपा आंखें मूंद कर उनकी इस भड़काऊ मुहिम को प्रोत्साहन देती रही। भाजपा अगर शुरू में ही उनके इन भड़काऊ इरादों पर लगाम लगा लेती तो राजकुमार सैनी अलग पार्टी बनाने का ख्वाब नहीं देख पाते ।
भाजपा ने क्यों नहीं लगाई लगाम?
यह बड़ा सवाल लगातार उठता रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने राजकुमार सैनी की भड़काऊ मुहिम पर लगाम क्यों नहीं लगाई ।
प्रदेश के राजनीतिक माहौल को गहराई से खंगालने पर यह पता चलता है कि जाट और गैर जाट की खटास का सबसे अधिक फायदा भाजपा को ही मिलता नजर आ रहा है।
 भाजपा जहां एक तरफ जाट वोटरों को आरक्षण का लॉलीपॉप देकर बहलाए हुए हैं वहीं दूसरी तरफ गैर जाट वोटरों को अपने पाले में करने के लिए हर मुमकिन प्रयास किए हुए हैं ।
राजकुमार सैनी को एक सोची-समझी योजना के तहत भाजपा ने ही प्रोजेक्ट किया। भाजपा उनके जरिए गैर जाट वोटरों को लामबंद करने की सोच रखती थी । इसलिए उसने अपने सांसद राजकुमार सैनी की हर गलत हरकत को नजरअंदाज किया। वोटबैंक की राजनीति के कारण ही भाजपा ने राजकुमार सैनी पर लगाम लगाने की कभी कोशिश नहीं की।
 सैनी क्यों बना रहे अलग पार्टी?
जाट आरक्षण आंदोलन में हुई व्यापक हिंसा के बाद राजकुमार सैनी को पूरे प्रदेश में उम्मीद से कहीं अधिक समर्थन हासिल हुआ जिसके चलते उनको यह एहसास हो गया कि वह बड़े नेता बन चुके हैं और cm पद के बड़े दावेदार हैं।
 भाजपा में बने रहने के लिए उन्होंने अगले चुनाव में उनको CM प्रोजेक्ट करने की शर्त रखी थी। भाजपा ने उनकी इस डिमांड को पूरा नहीं किया जिसके चलते राजकुमार सैनी को अलग पार्टी बनाकर किस्मत आजमाने का ख्याल आ गया। इसीलिए उन्होंने लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया।
 नई पार्टी का क्या पड़ेगा प्रभाव?
 राजकुमार सैनी की नई पार्टी का सियासी प्रभाव प्रदेश की सियासत पर जरूर पड़ेगा। भाजपा, कांग्रेस और इनेलो बसपा गठबंधन के बीच त्रिकोणीय चुनावी जंग में राजकुमार सैनी की पार्टी को मिलने वाले एक-एक वोट भाजपा को ही घाटा देने का काम करेगा।
पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सैनी वोटरों ने भाजपा को ही ज्यादा वोट दिया था। आगामी चुनाव में ऐसा मुमकिन होता दोबारा नजर नहीं आ रहा है।
 सैनी वोटर प्रदेश की एक दर्जन सीटों पर प्रभाव रखते हैं। नारायणगढ, मुलाना, रादौर, शाहाबाद, लाडवा, थानेसर, पिहोवा, कैथल, पुंडरी, बरवाला, हिसार, हांसी और नारनोल सीटों पर सैनी वोटबैंक निर्णायक भूमिका रखता है । इन सीटों में से 8 सीटों पर अभी भाजपा के विधायक हैं । सैनी की पार्टी के कारण इन 1 दर्जन सीटों पर भाजपा के लिए खतरे की घंटी बज गई है। इसके अलावा कुरुक्षेत्र संसदीय सीट पर भी सैनी वोट बैंक हार जीत का फैसला करने की ताकत रखता है। राजकुमार सैनी की पार्टी के कारण अगले चुनाव में कुरुक्षेत्र संसदीय सीट पर भाजपा की जीत खटाई में पड़ गई है ।
खरी खरी बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने सियासी फायदे के लिए राजकुमार सैनी को ही पाल पोस कर ताकतवर बनाया था ।उनको ज्यादा ताकत देना भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हो गया और वह वर्तमान हालात में भाजपा के लिए भस्मासुर साबित होते नजर आ रहे हैं।
पहले चुनाव में उनकी पार्टी की बड़ी चुनावी सफलता कच्ची नजर आती है मगर वह भाजपा की चुनावी संभावनाओं का सत्यानाश करने का काम पक्की करती जरूर नजर आ रही हैं करेगी ।राजकुमार सैनी अति आत्मविश्वास में आकर अलग पार्टी का गठन कर रहे हैं।
 अलग पार्टी बनाना प्रदेश के दिग्गज नेताओं स्वर्गीय बंसी लाल व भजन लाल को भी रास नहीं आना था आया था। इसलिए राजकुमार सैनी की पार्टी के सत्ता हासिल करने के दावों पर अभी से सवालिया निशान लगना लाजमी है क्योंकि वह खुद इतने बड़े नेता नहीं है कि उनके नाम पर 35 बिरादरी वोट देकर उनकी पार्टी की सरकार बनवा दे । cm बनने की महत्वाकांक्षा ने उनको अलग पार्टी बनाने के लिए प्रेरित किया है । उनकी पार्टी के अंजाम का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
 भाजपा ने अपने सियासी फायदे के लिए सनी को प्रोजेक्ट किया था लेकिन वह उसकी सत्ता में वापसी के मार्ग पर कांटे बिछाने वाले शख्स नजर आ रहे हैं । सैनी को खुली छूट देने का भारी खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है।

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