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रणदीप व JP ने दुश्मनी पर जड़ा ताला / Randeep Surjewala and JP starts new Friendship

रणदीप व JP ने दुश्मनी पर जड़ा ताला 
दो दशक की सियासी दुश्मनी को खत्म करने का किया ऐलान
 बांगर की सियासत में नए दौर का आगाज 
दो दर्जन सीटों पर असर डालेगी नई जुगलबंदी
 कुलदीप श्योराण
 कैथल । प्रदेश की राजनीति में आज उस समय एक बड़ा धमाका हो गया जब दो दशकों से कट्टर सियासी दुश्मन चले आ रहे रणदीप सिंह सुरजेवाला और जयप्रकाश ने साथ मिलकर चलने का ऐलान कर दिया।
 दोनों नेताओं की जुगलबंदी प्रदेश की बांगर की सियासत पर निर्णायक असर डालने का काम करेगी। दोनों नेताओं ने आज कैथल में साथ मिलकर काम करने की घोषणा की।
केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह के  बुढ़ापे दौर के बीच रणदीप और JP ही बांगर की सियासत के इस समय सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। दोनों का लंबा अनुभव है और खास रसूख है।
रणदीप सुरजेवाला जहां कांग्रेस के “राहुल राज” के खासमखास सिपहसालार हैं, वही जयप्रकाश भी मंजे हुए सियासी पहलवान हैं।
रणदीप को अपने बड़े ख्वाबों को पूरा करने के लिए जहां जयप्रकाश जैसे नेताओं की जरूरत है वही जयप्रकाश को भी कांग्रेस में अपनी सियासत बचाए रखने के लिए रणदीप का सहयोग लेना जरूरी और मजबूरी दोनों ही हैं ।
रणदीप आने वाले समय में बड़ी सियासत के दावेदार बनने की हसरत रखते हैं और इसके लिए उन्हें JP जैसे बड़े चेहरों को साथ लेना बेहद जरूरी है ।
रणदीप सुरजेवाला के साथ इस समय पूर्व विधायक अनिल धंतौड़ी , रमेश गुप्ता,  सुल्तान सिंह जडौला, बचन सिंह आर्य , राजकुमार वाल्मीकि, बुल्ले शाह, शिव शंकर भारद्वाज, सुरेश गुप्ता जैसे कांग्रेस के बड़े चेहरे जुड़ चुके हैं । इसके अलावा उनके साथ एक दर्जन उभरते हुए नेता भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं । रणदीप सुरजेवाला के बढ़ते हुए रसूख के चलते हुड्डा खेमे के भी कई नेता उनके संपर्क में हैं । जयप्रकाश का रणदीप के साथ हाथ मिलाना यह साबित कर रहा है कि वह तेजी से अपना ग्राफ ऊंचा उठाते जा रहे हैं। रणदीप और जेपी की जुगलबंदी प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं को अपने भविष्य की रणनीति को बदलने पर विचार करने के लिए मजबूर करेंगी।
 खरी खरी बात यह है कि रणदीप सुरजेवाला और जयप्रकाश की नई जुगलबंदी कांग्रेस के बदल रहे माहौल का आइना दिखा रही है।
कांग्रेस में राहुल राज आरंभ होने के बाद जहां पुराने नेताओं के चौधर हासिल करने के आसार कम हो रहे हैं, वही गांधी परिवार के विश्वासपात्र नेताओं को बड़े पदों पर बिठाने की प्रबल संभावना दिख रही है।
 कांग्रेस के अंदर हमेशा व्यक्तिगत लाभ की सियासत ही चलती आई है । जिस नेता के साथ हाईकमान का आशीर्वाद होता है। उसके साथ बाकी नेता रातों-रात पाला बदलने में कोताही नहीं करते हैं। अब देखना यह है कि रणदीप और JP की है जुगलबंदी आगे चलकर क्या नए गुल खिलाती है। दोनों का दुश्मनी के 36 के आंकड़े को खत्म करके साथ मिलकर चलने के 11 के आंकड़े का ऐलान करना दोनों ही नेताओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
जयप्रकाश को पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का खासमखास माना जाता है। उनका हुड्डा प्रेम छोड़कर रणदीप के गले मिलना यह बता रहा है कि कांग्रेस के अंदर समीकरण और माहौल दोनों ही बदल रहे हैं।

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