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मेयर के चुनाव करेंगे सियासी उलटफेर/Mayer direct elections going to deciding factor

मेयर के चुनाव करेंगे सियासी उलटफेर
सीधे चुनाव का फैसला पड़ सकता है भाजपा पर भारी
कांग्रेस के लिए सबसे अधिक फायदे के बन रहे आसार
इनेलो भी कर सकेगी शहरी पॉलिटिक्स में दमदार भागीदारी
 सीधे चुनाव बदलेंगे प्रदेश का सियासी माहौल 
कुलदीप श्योराण
 चंडीगढ़ । क्या यह सही है कि भाजपा सरकार का मेयरों का सीधा चुनाव कराने का फैसला बहुत रिस्की साबित हो सकता है?
-क्या यह सही है कि भाजपा ने शहरों के बलबूते पर सत्ता में दोबारा वापसी का पासा फेंका है?
-क्या यह सही है कि भाजपा के लिए यह फैसला आत्मघाती साबित हो सकता है?
– क्या यह सही है कि मेयरों का सीधा चुनाव होना सबसे अधिक फायदा कांग्रेस को पहुंचाएगा?
– क्या यह सही है कि मेयरों के सीधे चुनाव ने इनेलो के लिए भी शहरी पॉलिटिक्स में दमदार एंट्री का रास्ता खोल दिया है?
-क्या यह सही है कि मेयरों का सीधा चुनाव कराना प्रदेश के सियासी माहौल में निर्णायक बदलाव करने का काम करेगा?
-क्या यह सही है कि मेयर चुनाव का परिणाम सत्ता की दावेदारी का फैसला करेगा?
उपरोक्त सभी सवालों का जवाब हां में है।
भाजपा सरकार ने मेयर का चुनाव सीधा वोटरों से करवाने का फैसला लेकर बहुत बड़ा सियासी दांव खेल दिया है।
यह दांव अगर भाजपा के पक्ष में पड़ा तो वह सियासी फायदा उठाने में आंशिक सफल रहेगी। लेकिन अगर वह चुनाव में हार गई तो उसका बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस फैसले के तहत सबसे पहले यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक और हिसार नगर निगमों के चुनाव अगले महीने अक्टूबर में हो सकते हैं।
क्यों किया यह फैसला ?
भाजपा सरकार का मेयरों का चुनाव सीधा कराने का फैसला बहुत अहमियत रखता है।
भाजपा रणनीतिकार यह सोचते हैं कि इस समय शहरों में प्रभुत्व रखने वाले पंजाबी और बनिया समुदाय के वोटर उसके साथ खड़े हैं ।
कांग्रेस में घर की महाभारत के चलते एकजुटता का माहौल नहीं है तो दूसरी तरफ इनेलो भी शायरी वोटरों की फेवरेट नहीं है ।
इसलिए भाजपा सोचती है कि वह मेयरों का चुनाव जीतकर दोबारा से सत्ता में वापसी का मजबूत दावा पेश करेगी। इसलिए उसने मेयरों का चुनाव सीधा कराने का फैसला लिया।
 क्या पड़ेगा असर ?
मेयर के चुनाव का परिणाम प्रदेश की राजनीति पर गहराई तक असर डालने का काम करेगा । अगर 5 नगर निगमों में भाजपा का डंका बज गया तो वह यह संदेश देने में सफल रहेगी कि वह लोकप्रियता के मामले में नंबर एक पर खड़ी है।
 लेकिन अगर वह मेयरों के चुनाव में शिकस्त खा गई तो उसके लिए लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव में वापसी करना नामुमकिन हो जाएगा।
 कांग्रेस के लिए यह चुनाव बंपर फायदा देने वाले साबित हो सकते हैं। शहरों में आमतौर पर भाजपा और कांग्रेस में ही वर्चस्व की लड़ाई चलती आई है।
भाजपा सरकार के प्रति जनता में व्याप्त नाराजगी का फायदा शहरों में कांग्रेस को ही सबसे अधिक होने के आसार नजर आते हैं। इसलिए मेयर का चुनाव सीधा होने पर कांग्रेस अगर बाजी मार ले गई तो वह उसके लिए सोने पर सुहागा का काम करेगा ।
इनेलो के लिए भी मेयर का चुनाव सीधा होना बड़ा फायदा देने का काम कर सकता है ।
पानीपत, यमुनानगर और हिसार में इनेलो के लिए मेयर बनाने की पूरी गुंजाइश नजर आती है जिसके चलते वह शहरी क्षेत्रों में मजबूत इंट्री की दावेदारी पेश कर सकती है। अगर इनेलो दो या तीन मेयर बनाने में सफल हो गई तो वह उसके लिए सत्ता में वापसी का दरवाजा खोलने का जरिया साबित हो सकता है।
 भाजपा के लिए है भारी रिस्क
 मेयर का चुनाव सीधा होना भाजपा को या तो पूरा फायदा पहुंचाएगा या फिर पूरा नुकसान देने का काम करेगा ।
भाजपा इस समय सत्ता पर काबिज है। अगर वह पांचो नगर निगमों में अपने मेयर बनाने में सफल रही तो उसकी सत्ता में वापसी की दावेदारी मजबूत हो जाएगी और अगर वह इन चुनावों में पराजित हो गई तो उसके लिए सत्ता में वापसी का दरवाजा बंद हो जाएगा ।
खरी खरी बात यह है कि मेयर का चुनाव सीधा होने से पार्षदों की खरीद-फरोख्त में होने वाला भ्रष्टाचार रुक जाएगा। इसके अलावा मेयर को हटाने के लिए हर छठे महीने होने वाली गतिविधियों पर भी रोक लग जाएगी। सीधे चुनाव का दूसरा पहलू यह है कि मेयर का चुनाव बहुत महंगा हो जाएगा और उसकी ताकत स्थानीय विधायक से भी ज्यादा हो जाएगी।
 मेयरो का चुनाव सीधा होना प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक फैसला कहा जाएगा और इन मेलों के चुनाव का परिणाम प्रदेश के आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव का माहौल तय करने का काम करेगा। मेयर का चुनाव सीधा करने का फैसला लेकर भाजपा ने बहुत बड़ा रिस्क मोड़ लिया है।
 भाजपा के लिए इस फैसले में फायदे से अधिक नुकसान की गुंजाइश ही अधिक आती है क्योंकि ढाई लाख से लेकर 3:30 लाख तक वोटरों को रिझाना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि इन लाखों वोटरों में शहरी वोटरों के अलावा ग्रामीण पृष्ठभूमि के वोटर भी शामिल होंगे जो भाजपा के समीकरणों को बिगाड़ने का काम कर सकते हैं। जो भी पार्टी मेयर के चुनाव में जीत का परचम फहराएगी वही आगामी लोकसभा में विधानसभा चुनाव में जीत की सबसे प्रबल दावेदार होगी और बाकी पार्टियों के लिए इस हार से उभरना आसान नहीं होगा। मेयर के चुनाव प्रदेश की सियासत में उलटफेर करने का काम करेंगे।

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