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भाजपा और सैनी सांप-छछूंदर की राजनीति में फंसे/Saini playinng greedy politics

भाजपा और सैनी सांप-छछूंदर की राजनीति में फंसे
लालच की राजनीति में उलझे राजकुमार सैनी 
नई पार्टी बनाने का ऐलान करने के बावजूद भाजपा छोड़ने को तैयार नहीं
कुलदीप श्योराण 
चंडीगढ़।क्या यह सही है कि कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी कल पानीपत में नई पार्टी का के गठन का ऐलान करने जा रहे हैं?
-क्या यह सही है कि राजकुमार सैनी पिछले 2 साल से भाजपा को आंखें दिखाने का काम कर रहे हैं?
-क्या यह सही है कि राजकुमार सैनी भाजपा को छोड़ने का कल ऐलान नहीं करेंगे ?
-क्या यह सही है कि राजकुमार सैनी चाहते हैं कि भाजपा उनको निकाल दें ताकि उनकी सांसदी बची रहे?
-क्या यह सही है कि राजकुमार सैनी ललकार की राजनीति की बजाय लालच की राजनीति में उलझ गए हैं?
उपरोक्त सभी सवालों का जवाब हां में है।
भाजपा के विद्रोही सांसद राजकुमार सैनी कल पानीपत में नई पार्टी के गठन का ऐलान करने जा रहे हैं। वेैं पिछले 2 साल से भाजपा को पानी पी-पीकर कोस रहे हैं लेकिन उसे छोड़ने को तैयार नहीं है।
राजकुमार सैनी कल पानीपत में नई पार्टी तो बनाने का ऐलान करेंगे लेकिन भाजपा छोड़ने का एलान नहीं करेंगे। यानी राजकुमार सैनी लालच की राजनीति कर रहे हैं। वह आर-पार की राजनीति करने की बजाय लालच की राजनीति कर रहे हैं।
वह चाहते हैं कि नई पार्टी का गठन करने के बावजूद उनकीे सांसदी बची रहे। यह तभी हो सकता है जब वह भाजपा उनको निष्काषित कर दें। भाजपा भी उनकी मंशा को समझती है और रोजाना आलोचना झेलनी के बावजूद राजकुमार सैनी को निष्कासित करने का फैसला नहीं ले रही है। यही कारण है कि राजकुमार सैनी कल नई पार्टी का ऐलान तो करेंगे लेकिन भाजपा में बने रहेंगे।
क्या है सैनी की मजबूरी?
 राजकुमार सैनी अगर सांसदी से इस्तीफा देते हैं तोे उनकी सीट पर उपचुनाव होगा क्योंकि अभी लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने में 8 महीने का समय बाकी है । 6 महीने से ज्यादा का समय शेष रहने पर अगर कोई सांसद इस्तीफा देता है या किसी की मृत्यु हो जाती है तो उस सीट पर उपचुनाव कराया जाता है ।
राजकुमार सैनी नई पार्टी के गठन के साथ उपचुनाव के फेर में नहीं पड़ना चाहते हैं। वह यह जानते हैं कि अगर वह चुनाव नहीं लड़ेंगे तो डरपोक कहलाएंगे और अगर उपचुनाव लड़कर बुरी तरह हार गए तो उनके पार्टी के दमखम की पोल खुल जाएगी । इसलिए वे भाजपा छोड़ने का फैसला नहीं कर रहे हैं । वे चाहते हैं कि भाजपा खुद उनको निष्कासित करने का ऐलान करें ताकि उनकी सांसदी बची रहे।
भाजपा क्यों नहीं ले रही फैसला?
भाजपा भी राजकुमार सैनी की तरह दोहरी मजबूरी में फंसी हुई है ।
वह राजकुमार सैनी को निष्कासित कर के OBC वोटरों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती क्योंकि उसे राजकुमार सैनी को निष्कासित करने का कारण भी बताना पड़ेगा। फिलहाल ऐसा कोई कारण भाजपा को नजर नहीं आ रहा है जिसके आधार पर वह राजकुमार सैनी को निकालना जायज ठहरा सके।
 भाजपा भी फिलहाल किसी लोकसभा सीट पर उपचुनाव नहीं चाहती है क्योंकि हाल में जितने भी उपचुनाव हुए हैं उनमें भाजपा की करारी हार हुई है । अगर भाजपा भी उपचुनाव में हार गई तो उसके लिए सत्ता में वापसी का रास्ता बंद हो जाएगा। यही कारण है कि भाजपा राजकुमार सैनी की गालियां सुनने को मजबूर है और चाह कर भी वह उसे निष्कासित करने का फैसला नहीं ले पा रही है।
 खरी खरी बात यह है कि राजकुमार सैनी भाजपा के लिए छछूंदर बन गए हैं । वह न तो उसे उगल पा रही है और न ही निगल पा रहे हैं ।
राजकुमार सैनी भी जिस़ ललकार की राजनीति करते आए हैं उस के विपरीत व्यवहार कर रहे हैं ।
वह संसद से इस्तीफे का बोल्ड फैसला लेने की बजाय डरपोक राजनीति कर रहे हैं और भाजपा का सांसद रहते हुए अलग पार्टी का गठन कर रहे हैं। यह पूरी तरह से जनता और समर्थकों को गुमराह करने की राजनीति की जा सकती है।
जिस पार्टी से उनका मन भर गया है , जिस पार्टी को वे कोस रहे हैं उसमें रहने का उनको नैतिक अधिकार नहीं है लेकिन वह नैतिकता को कोने में पटकते हुए अपने फायदे की राजनीति कर रहे हैं । इसलिए भाजपा में रहते हुए, उसका सांसद होते हुए अलग पार्टी बनाने का ऐलान करेंगे। यह राजकुमार सैनी की मौकापरस्त सियासत ही कही जाएगी ।
अगर सैनी कल नई पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच के गठन के साथ साथ भाजपा से इस्तीफा देने का ऐलान नहीं करेंगे तो यही समझा जाएगा दमदार नेता नहीं बल्कि डरपोक नेता है।
अगर वह प्रदेश के बड़े नेता बनना चाहते हैं और अगर उनको अपने जनाधार पर पूरा यकीन है तो उन्हें कल नई पार्टी के गठन का ऐलान करने के साथ-साथ भाजपा को ठोकर मारने का ऐलान भी डंके की चोट पर करना चाहिए।

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