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बरोदा उपचुनाव में गठबंधन में बगावत की आशंका

बरोदा की बिसात
काउंट डाउन 93

 

योगेश्वर दत्त की दावेदारी के खिलाफ कई नेताओं में असंतोष

कुलदीप श्योराण
बरोदा। भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी के लिए रसूख का सवाल माने जा रहे बरोदा उपचुनाव की तारीखों की घोषणा होने से पहले ही गठबंधन में बगावत के आसार नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा पूर्व प्रत्याशी योगेश्वर दत्त के पक्ष में इशारा करने के बाद गठबंधन की टिकट के दूसरे प्रबल दावेदारों में असंतोष फैला हुआ है और टिकट की घोषणा होने के बाद गठबंधन में बगावत होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अगर दावेदारों ने बगावत कर दी तो उपचुनाव में उसका भारी खामियाजा भुगतने के लिए गठबंधन को तैयार रहना होगा।

आधा दर्जन दावेदार ठोक रहे ताल

बीजेपी-जेजेपी गठबंधन की टिकट हासिल करने के लिए बरोदा में आधा दर्जन नेता अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। दावेदारों में योगेश्वर दत्त के अलावा जेजेपी राष्ट्रीय महासचिव केसी बांगड़, डॉ कपूर सिंह नरवाल, जेजेपी पूर्व प्रत्याशी भूपेंद्र मलिक, भूपेंद्र मोर और उमेश शर्मा प्रमुख हैं। सीएम दबी जुबान के साथ योगेश्वर दत्त के पक्ष में बयान दे चुके हैं और अफसरशाही भी उन्हीं को रिपोर्ट कर रही है लेकिन दूसरे दावेदारों ने अभी हौंसला नहीं छोड़ा है।
उन्हें यह लग रहा है कि कमजोर परफॉर्मेंस के चलते योगेश्वर दत्त की टिकट अभी भी कर्ट सकती है इसलिए सभी दावेदार अभी भी टिकट की कतार में खड़े हुए हैं और अपने आकाओं के जरिए टिकट हासिल करने की जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं।

पक्की होगी बगावत
गठबंधन के दावेदारों में टिकट हासिल करने के लिए आर-पार की कोशिशें चल रही हैं।
अगर योगेश्वर दत्त को गठबंधन की टिकट मिली तो दो या तीन दावेदार बगावत भी कर सकते हैं।
इन दावेदारों की बगावत की उम्मीद कांग्रेस भी कर रही है और टिकट कटते ही उनके ऊपर डोरे डालने की कार्रवाई की प्लानिंग को अमलीजामा पहनाया जा चुका है।
खास तौर पर डॉक्टर कपूर सिंह नरवाल, भूपेंद्र मलिक और भूपेंद्र मोर आक्रामक रूप से टिकट के दावेदारी कर रहे हैं। अगर इन नेताओं को टिकट नहीं मिली तो इन तीनों नेताओं की बगावत की प्रबल संभावना हो सकती है।
खरी खरी बात यह है कि बीजेपी-जेजेपी गठबंधन बरोदा उप चुनाव को जीतने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। उसके पास मजबूत उम्मीदवारों की कतार भी है।
योगेश्वर दत्त को टिकट देना मुख्यमंत्री की पहली पसंद है लेकिन फील्ड रिपोर्टों में योगेश्वर दत्त की दावेदारी पर सवालिया निशान लग रहे हैं ऐसे में दूसरे दावेदारों उनकी इस कमी का फायदा उठाकर टिकट हासिल करने के लिए दमखम लगा रहे हैं।
अगर मुख्यमंत्री की ख्वाहिश के अनुसार योगेश्वर दत्त को टिकट मिली तो गठबंधन के दावेदारों में बगावत पक्का होगी और यह बगावत गठबंधन की जीत की संभावनाओं पर वज्रपात करने का काम करेगी।
गठबंधन के सभी दावेदारों का अपने अपने इलाके में असरदार प्रभाव है। ऐसे में उनका चुनाव के समय बगावत करना गठबंधन के लिए भारी नुकसान साबित होगा‌ अब देखना यही है कि गठबंधन के रणनीतिकार इस बगावत को रोकने के लिए क्या प्रबंध करते हैं और कितना सफल होते हैं??

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