बरोदा की बिसात
काउंटडाउन-94

दुष्यंत चौटाला के बजाय रणजीत सिंह पर भाजपा को ज्यादा भरोसा

बिजली मंत्री रणजीत सिंह के जरिए जाट वोटरों को जोड़ने का अभियान शुरू

कुलदीप श्योराण
बरोदा। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के गढ़ बन चुके बरोदा हलके के उप चुनाव को जीतने के लिए भाजपा ने मास्टर प्लान पर काम करना आरंभ कर दिया है।
भाजपा के विरोधी कहे जाने वाले देवीलाल विचारधारा के हजारों वोटरों को अपने साथ लामबंद करने के लिए भाजपा ने बिजली मंत्री रणजीत सिंह पर भरोसा जताया है।
रणजीत सिंह ने 2 दिन के दौरान बरोदा हलके के 14 गांवों का दौरा करते हुए दर्जनों जगह दशकों पुराने पारिवारिक रिश्ते को ताजा किया।
रणजीत सिंह ने सियासत और पारिवारिक रिश्तो को घोलते हुए हर जगह जाट वोटरों को अपनेपन का एहसास दिलाया।
रणजीत सिंह बड़े करीने के साथ जाट वोटरों को बरोदा उपचुनाव में भाजपा का साथ देने के फायदे गिनाते हुए नजर आए।
रणजीत सिंह यह बखूबी जानते हैं कि अपनेपन के जरिए ही जाट वोटरों को भाजपा के साथ जोड़ा जा सकता है।
बरोदा हलके की हार-जीत में देवीलाल विचारधारा के वोटों का सबसे महत्वपूर्ण रोल होने के कारण ही भाजपा में रणजीत सिंह को सबसे पहले सियासी मैदान में उतारा है।

रणजीत सिंह को सुनने के लिए हर जगह भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों की भारी संख्या यह बता रही थी कि देवीलाल परिवार के प्रति अभी भी बरोदा हलके में लगाव बाकी है और लोग उन्हें देखना और सुनना पसंद करते हैं।
भाजपा ने समझदारी के साथ रणजीत सिंह को मैदान में उतारा है।
भाजपा के रणनीतिकार भी जानते हैं कि जाटों का “एक चौथाई” हिस्सा हासिल किए बगैर वह बरोदा की “जंग” नहीं जीत पाएगी।
इसलिए उसने रणजीत सिंह के जरिए बेहद “खास”वोटबैंक पर निशाना साधा है जो वैचारिक तौर पर भाजपा और भूपेंद्र हुड्डा दोनों के खिलाफ रहा है।
भूपेंद्र हुड्डा की खिलाफत को अपने पक्ष में करने के लिए ही भाजपा ने रणजीत सिंह का सहयोग लिया है।
रणजीत सिंह के दौरों के जरिए भाजपा ने बरोदा के देवीलाल विचारधारा के वोटरों को टटोलने का काम किया है।
उनके दोरों के रिस्पॉन्स का आकलन करने के बाद आगामी रणनीति को अमलीजामा पहना जाएगा।

खरी खरी बात यह है कि भाजपा बरोदा का उपचुनाव जीतने के लिए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के रहमों करम पर नहीं रहना चाहती है।
देवीलाल विचारधारा के वोटों को अपने साथ जोड़ने के मामले में उन्हें दुष्यंत चौटाला की बजाय बिजली मंत्री रणजीत सिंह ज्यादा भरोसेमंद नजर आए हैं।
जन नायक चौधरी देवी लाल का बेटा होने के कारण रणजीत सिंह को जाट वोटरों का बड़ा सम्मान हासिल हुआ।
भाजपा ने रणजीत सिंह को इन वोटरों को गठबंधन के साथ जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा यह उम्मीद करती है कि रणजीत सिंह के जरिए देवीलाल विचारधारा के वोटरों को आसानी से अपने साथ जोड़ सकती है।
रणजीत सिंह के 2 दिन के कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी में गर्मजोशी के साथ साथ अपनेपन की भावना भी रही।
बरोदा के चुनावी दंगल को जीतने के लिए भाजपा हर नेता को उसके प्रभाव और पकड़ के हिसाब से जिम्मेदारी सौंप रही है।
बिजली मंत्री रणजीत सिंह को सबसे पहले इसलिए मैदान में उतारा गया है क्योंकि वह उस वोटबैंक को भाजपा के साथ जोड़ सकते हैं जो खुले तौर पर भाजपा की खिलाफत में खड़ा है।
यह वोटबैंक भूपेंद्र हुड्डा से भी उतनी ही दूर रखता है।
रणजीत सिंह के बड़े चेहरे के जरिए भाजपा ने देवीलाल विचारधारा के वोटरों को अपने साथ जोड़ने का अभियान शुरू किया है।
रणजीत सिंह के दौरों का प्रभाव चुनाव के परिणाम के ट्रैक को तय करने का काम कर सकता है‌।
भाजपा ने पूरे होमवर्क के बाद ही रणजीत सिंह को सबसे पहले जाट वोटरों के बीच में भेजा है।
भाजपा के पास बिरेंद्र सिंह, धर्मवीर सिंह, सुभाष बराला, ओमप्रकाश धनखड़ और कैप्टन अभिमन्यु जैसे एक दर्जन बड़े जाट चेहरे हैं लेकिन इनकी बजाय रणजीत सिंह को इसलिए पहला सिपहसलार बनाया गया है क्योंकि उनके पिता चौधरी देवीलाल की विचारधारा के वोटरों के समर्थन के बिना भाजपा किसी भी सूरत में बरोदा का दंगल नहीं जीत पाएगी।
रणजीत सिंह के दोरो का पास या फेल होना बरोदा के चुनाव परिणाम पर बड़ा असर डालने का काम करेगा।

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