परफॉर्मेंस की बजाए गड़बड़ियों में दूसरे मंत्रियों को पछाड़ा

फूड एंड सप्लाई, एक्सरसाइज के बाद रेवेन्यू डिपार्टमेंट में भी भारी गड़बड़ी

एक के बाद एक विभागों में गड़बड़ियां पकड़े जाने से उठ रहे गंभीर सवाल


कुलदीप श्योराण
चंडीगढ़। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला किसी न किसी कारण से अक्सर चर्चा में रहते हैं। बीजेपी-जेजेपी की 9 महीने पुरानी सरकार में ईमानदारी के दावे चकनाचूर होने के साथ साथ घोटालों की कतार लगनी शुरू हो गई है।
घोटालों की संख्या में दुष्यंत चौटाला के विभाग नंबर वन पर चल रहे हैं। दुष्यंत चौटाला के पास 10 विभाग हैं और इतने विभागों का संचालन ठीक तरह से नहीं होने के कारण उनके विभागों में एक के बाद एक गड़बड़ियां पकड़ी जा रही हैं।
फूड एंड सप्लाई, आबकारी विभाग के बाद अब रेवेन्यू विभाग में भी बड़े घोटाले की गूंज सुनाई दे रही है। घोटालों की संख्या के मामले में दुष्यंत चौटाला के विभाग बाकी मंत्रियों को पछाड़ते हुए सबसे आगे चल रहे हैं।

चावल घोटाले का सिलसिला जारी

सबसे पहले फूड एंड सप्लाई विभाग में धान घोटाले की गूंज दूर तक गई। अधिकारियों की मिलीभगत के साथ मंडियों में धान खरीद के समय भारी घोटाला सामने आया था। उत्पादन से ज्यादा खरीद को अंजाम देकर साफ तौर पर भारी घोटाले का खेल रचा गया। घोटाले को ढकने के लिए उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने 10 दिन का समय देकर चोर बाजारी करने वाले को स्टॉक इकट्ठा करने का भरपूर अवसर दिया।
उसके बाद स्टॉक की जांच के लिए उन्हीं अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई जो इस पूरे खेल में शामिल थे। इस कारण बड़े घोटाले को दबाकर छोटी हेराफेरी को साबित किया गया।
लोक डाउन के दौरान बेईमान शैलर मालिकों ने करोड़ों रुपए का धान बाजार में मोटे मुनाफे के साथ बेच खाया और अब दुष्यंत चौटाला का विभाग घोटाले की लकीर को पीटने का ड्रामा कर रहा है।

करोड़ों की शराब बिक्री के जरिए हुए वारे न्यारे
लॉकडाउन के दौरान दुष्यंत चौटाला का आबकारी विभाग खास चर्चा में रहा। सारी दुकानों के बंद होने के बावजूद कई दिनों तक शराब के ठेके खुले रहे जिसके चलते दुष्यंत चौटाला को सार्वजनिक आरोपों के घेरे में जाना पड़ा।
उसके बाद आबकारी विभाग की आंखों के नीचे अवैध शराब बिक्री के जरिए करोड़ों के वारे न्यारे किए गए। आबकारी विभाग के अधिकारियों और पुलिस विभाग के साथ मिलीभगत करके शराब माफिया ने लोक डाउन के दौरान करोड़ों रुपए की शराब बेचते हुए मौके का भरपूर फायदा उठाया।
एल वन और एल 13 के गोदामों से लाखों पेटियां जांच के दौरान गायब मिली। खास मेहरबानी के कारण कुछ ठेकेदारों के स्टॉक की जांच भी नहीं की गई। करोड़ों रुपए की इस हेराफेरी के मामले में दुष्यंत चौटाला के विभाग ने अभी तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ठेंगा ही दिखाया है।

दुष्यंत चौटाला ने अपने वायदे के अनुसार न तो शराब के ठेकों पर रेट लिस्ट लगवाई और ना ही बिक्री के स्कैनिंग के लिए मशीनें लगवाई जिसके कारण शराब के दामों में सरकार की ₹20 प्रति बोतल की बढ़ौतरी की जगह ठेकेदार ₹100 से लेकर हजार रुपए तक की बढ़ोतरी करके भरपूर मौज कर रहे हैं।

रजिस्ट्रियों में हुआ बड़ा खेल
लोक डाउन के दौरान कंगाल हो चुकी हरियाणा सरकार का खजाना भरने के लिए रजिस्ट्रियां खोलने का फैसला लिया गया।
यह फैसला सेटिंगबाज अफसरों और नेताओं को खूब रास आया। नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए रजिस्ट्री में बड़े खेल को अंजाम दिया गया।
गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, हिसार और दूसरे जिलों में नियमों को ताक पर रखकर रजिस्ट्री की गई।
बड़े घोटाले का पता लगते ही सरकार में हड़कंप मच गया जिसके चलते चलते 15 अगस्त तक रजिस्ट्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया।
सरकार रजिस्ट्री सिस्टम को सुधारने के नाम पर रजिस्ट्री रोकने का दावा कर रही है लेकिन जानकारों का कहना है कि रजिस्ट्रिओं में भारी गड़बड़ी के चलते सरकार को पाबंदी लगानी पड़ी है।
रेवेन्यू विभाग में रजिस्ट्री ओं में मची लूट के कारण सरकार को रजिस्ट्री या बंद करने का आदेश जारी करना पड़ा।

खरी खरी बात यह है कि दुष्यंत चौटाला एक दर्जन विभागों को संभाल पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
वे विभागों को पूरा समय नहीं दे रहे हैं जिसके चलते बेईमान अधिकारी ऐश कर रहे हैं और मनमर्जी के फैसले लेकर घपलों को अंजाम दे रहे हैं।
दुष्यंत चौटाला ने अपनी पार्टी के मंत्री अनूप धानक को भी दिखावे का मंत्रालय दिया है इसके अलावा खाली पड़े दूसरे मंत्री पद को भी भर नहीं रहे हैं।
इस मामले में रामकुमार गौतम का “खोपर एकला” जीम रहा है” का आरोप सिद्ध होता हुआ नजर आ रहा है।
दुष्यंत चौटाला के विभागों में एक के बाद एक घोटाले उजागर होना यह साबित करता है कि उनकी अगुवाई में ईमानदारी से काम नहीं हो रहा है और बेईमान अफसर मौज कर रहे हैं।
घोटालों में नंबर वन रहना दुष्यंत चौटाला की सियासी सेहत के लिए खराब साबित होगा।

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