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दिसंबर में ही होंगे लोकसभा चुनाव /Loksabha elections get place in Dec

दिसंबर में ही होंगे लोकसभा चुनाव 
 पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ होंगे लोकसभा चुनाव
हरियाणा विधानसभा चुनाव साथ कराने को लेकर भाजपा असमंजस में
कुलदीप श्योराण 
नई दिल्ली। क्या यह सही है कि आगामी लोकसभा चुनाव मई की बजाय नवंबर -दिसंबर में होने जा रहे हैं?
-क्या यह सही है कि भाजपा मोदी सरकार दोबारा बनाने के लिए दिसंबर को सबसे बेहतर समय मान रही है?
– क्या यह सही है कि भाजपा राजस्थान, मध्य प्रदेश,, छत्तीसगढ़ तेलंगाना और मिजोरम के विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा चुनाव कराना जरूरी मानती है?
-क्या यह सही है कि भाजपा को राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में जीत के आसार बहुत कम नजर आ रहे हैं?
-क्या यह सही है कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में हार का परिणाम आने से पहले लोकसभा चुनाव कराना चाहते हैं?
– क्या यह सही है कि दिसंबर में चुनाव करने पर ही नरेंद्र मोदी दोबारा केंद्र में भाजपा की सरकार बना सकते हैं ?
उपरोक्त सभी सवालों का जवाब हां में है।
 अब यह 99 फ़ीसदी साफ हो गया है कि आगामी लोकसभा चुनाव मई के बजाय दिसंबर में हो सकते हैं।
तेलंगाना में कल विधानसभा भंग होने के साथ ही यह नजर आने लगा है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ लोकसभा चुनाव कराने की तैयारी चल रही है।
दिसंबर में ही क्यों होंगे चुनाव ?
 मिजोरम , राजस्थान , छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में विधानसभा का कार्यकाल नवंबर से लेकर जनवरी तक पूरा हो रहा है। तेलंगाना की विधानसभा भंग होने के साथ वहां भी अगले 4 महीने में चुनाव कराए जाने जरूरी हो गए हैं ।
इन  राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम का असर देश की राजनीति पर सौ फ़ीसदी पड़ेगा। इन सभी 5 राज्यों में भाजपा भाजपा की सरकारें बनने के आसार बेहद कम हैं । इसलिए इन राज्यों के चुनाव परिणाम का खराब असर टालने के लिए लोकसभा चुनाव दिसंबर में कराए जाएंगे।
 भाजपा को क्या है डर?
 इस समय राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की 65 सीटों में से 62 लोकसभा सीटों पर भाजपा के सांसद हैं और तीनों ही प्रदेशों में भाजपा की सरकारें हैं। तीनों प्रदेशों के आगामी चुनाव में भाजपा के लिए अच्छे आसार नजर नहीं आ रहे हैं । राजस्थान उपचुनाव में भाजपा की करारी हार ने यह संकेत दे दिए हैं कि वहां हालात उसके अनुकूल नहीं हैं । मिजोरम में भी भाजपा के जीत के आसार नहीं हैं।
तेलंगाना में अभी टीआरएस की सरकार है और अगले चुनाव में भी वहां भाजपा की सत्ता आने की संभावना नजर नहीं आ रही है ।
अगर इन पांचों प्रदेशों में भाजपा विधानसभा चुनाव हार जाती है तो पूरे देश में उसके खिलाफ माहौल बनता हुआ नजर आएगा । उस स्थिति में नरेंद्र मोदी के लिए दोबारा बहुमत हासिल करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसलिए भाजपा रणनीतिकार इन पांचों राज्यों के साथ लोकसभा चुनाव कराना बेहतर मान रही है।
भाजपा को क्या होगा फायदा?
 अगर उपरोक्त पांचों राज्यों के साथ लोकसभा चुनाव होते हैं तो भाजपा को उतना नुकसान नहीं होगा जितना इन राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद मई में लोकसभा चुनाव होने पर होगा।
 अभी किसी को यह नहीं पता है कि राजस्थान ,मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में भाजपा कितनी नीचे जाएगी। इन हालात में भाजपा को वहां पर लोकसभा की सीटों पर कम नुकसान उठाना पड़ सकता है ।
अगर विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा लोकसभा चुनाव कराएगी तो इन राज्यों में भाजपा की सीटें आधे से भी कम हो सकती हैं । इसके अलावा इन प्रदेशों में हार का असर पूरे देश की सियासत में पड़ेगा जो भाजपा के सत्ता में वापसी की राह में बड़े रोड़े अटकाने का कारण बन सकता है । इसलिए अमित शाह और नरेंद्र मोदी कम नुकसान के बीच इन राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा चुनाव कराना ज्यादा बेहतर मान रहे हैं।
 क्या होगा हरियाणा में?
हरियाणा के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराए जाने को लेकर भाजपा में विचार बैठे हुए हैं। आधे भाजपा नेता यह मानते हैं कि लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराए जाने से सत्ता में वापसी के आसार ज्यादा रहेंगे।आधे नेताओं का यह मानना है कि केंद्र में दोबारा मोदी की सरकार बनने के बाद अगर विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे तो पिछली बार की तरह सत्ता हासिल करने के आसार ज्यादा होंगे क्योंकि तब पूरी पार्टी को सिर्फ महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा पर ही फोकस करना होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और ज्यादातर मंत्री बाद में चुनाव कराए जाने पर ही जोर दे रहे हैं। इसलिए यह लगता है कि हरियाणा के विधानसभा चुनाव पूरे समय पर ही यानी अगले अक्टूबर में कराए जाएंगे।
खरी खरी बात यह है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करना इस बार बेहद कठिन नजर आ रहा है।
 इन सभी 5 राज्यों में हार के बाद अगर मई में लोकसभा चुनाव होंगे तो प्रधानमंत्री मोदी के लिए भाजपा को दोबारा केंद्र की सत्ता पर काबिज करना आसान नहीं होगा क्योंकि 5 राज्यों में पराजित होने के बाद पूरे देश में भाजपा के खिलाफ बड़ा माहौल बन जाएगा जिसके बीच भाजपा को हिंदी बेल्ट में काफी सीटों पर हार का सामना करना पड़ सकता है ।
इस हार के माहौल से बचने के लिए ही भाजपा दिसंबर में इन पांच राज्यों के साथ विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव कराया जाना सही मान रही है और इसीलिए दिसंबर में लोकसभा चुनाव होने लग रहे हैं।
भाजपा के लिए यह फैसला समझदारी पूर्ण भी रहेगा क्योंकि मई में चुनाव होने पर इन राज्यों के विधानसभा चुनाव के हार का बुरा प्रभाव जरूर पड़ेगा। दिसंबर में चुनाव होने पर भाजपा कम नुकसान के साथ केंद्र में दोबारा सरकार बनाने का दावा ज्यादा मजबूती से ठोक पाएगी।

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