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गुजरात व हिमाचल चुनावों ने बजाई भाजपा के लिए खतरे की घंटी मोदी के मैजिक के कायम रहने पर खड़े हुए सवाल

गुजरात व हिमाचल चुनावों ने बजाई भाजपा के लिए खतरे की घंटी 

मोदी के मैजिक के कायम रहने पर खड़े हुए सवाल
खट्टर सरकार के कामकाज पर ही मिलेंगे वोट
गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी की जीत का जश्न मना रही है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से सत्ता छीनने और गुजरात में 22 साल की सत्ता बरकरार रखने के कारण भाजपा बेशक अपनी पीठ ठौक रही हो मगर चुनाव परिणामों का गहराई से पोस्टमार्टम यह बता रहा है कि भाजपा के लिए आने वाला समय आसान नहीं है।
गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा को चंद सीटों के फासले से मिली जीत और हिमाचल प्रदेश में प्रेम कुमार धूमल जैसे दिग्गज के चुनाव हार जाने से यह साफ हो गया है कि देश में मोदी का मैजिक कमजोर होने लगा है और जनता स्थानीय सरकारों के कामकाज के आधार पर वोट दे रही है।
मोदी के करिश्मे का धीमा पड़ना हरियाणा की भाजपा सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा गया है। यह सभी जानते हैं कि 2014 के चुनाव में हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी सिर्फ मोदी मैजिक के बलबूते पर ही सत्ता हासिल करने में सफल रही थी लेकिन अगले चुनाव में भी है करिश्मा दोहराया जाएगा इस बारे में आशंका के बादल ज्यादा मंडरा रहे हैं।

भाजपा सरकार जनता का दिल जीतने नें फेल

प्रदेश की भाजपा सरकार अभी जनता के दिलों पर राज करने में पूरी तरह से सफल नहीं हो पा रही है। ऐसे में अगर खट्टर सरकार का कामकाज जनता को पसंद नहीं आया तो भाजपा के लिए भी हार का अंजाम सामने आ सकता है।
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी सिर्फ इसलिए सत्ता हासिल करने में सफल रही क्योंकि जहां नरेंद्र मोदी ने खुद की प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी थी और गुजरात के बेटे के नाम पर वोट मांगे थे वहीं कांग्रेस के पास कोई ऐसा चेहरा नहीं था जो गुजराती वोटरों को अपने साथ इमोशनली जोड़ लेता।
कांग्रेस के सभी प्रमुख प्रादेशिक नेताओं का चुनाव हारना इस बात को साबित कर गया कि उसने कमजोर नेताओं पर भरोसा करके चुनावी जंग लड़ी थी। दोनों पार्टियों में इसी बारिक अंतर के बीच जहां भाजपा सत्ता की सरताज बन गई, वही पर कांग्रेस को बेहद कांटे की जंग में खाली हाथ रहना पड़ा।

सिर्फ मोदी मैजिक के भरोसे रहना बड़ी गलती

अगर मोदी का मैजिक कमजोर पड़ गया तो हरियाणा में भाजपा के लिए दोबारा सरकार बनाना किसी भी तरह से आसान नहीं होगा क्योंकि भाजपा के पास प्रदेश में अभी एक भी नेता ऐसा नहीं है जो पूरे प्रदेश के वोटरों पर अपना प्रभाव रखता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जनता का चहेता बनने की कोशिश तो काफी कर रहे हैं मगर अभी हुए अपने लक्ष्य से काफी दूर खड़े नजर आ रहे हैं।
जनता का अगर मोदी के मैजिक से भरोसा उठ गया तो खट्टर सरकार के कामकाज के आधार पर ही भाजपा को वोट मिलेंगे।
फिलहाल यह नजर आ रहा है कि भाजपा सरकार जनता की कसौटी पर खरा उतरने में सफल नहीं हो रही है।
 हिमाचल प्रदेश के चुनावों में भी यह बता दिया कि मनमर्जी करने वाले महाराजा वीरभद्र सिंह को जनता सत्ता से बेदखल करने में देर नहीं करती है। दूसरी तरफ भाजपा को सत्ता का सरताज बनाने वाले प्रेम कुमार धूमल को भी इसलिए हार का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके सामने ऐसा चेहरा चुनाव लड़ रहा था जो जनता के बेहद करीब रहकर राजनीति करता है।
जब प्रेम कुमार धूमल जैसा जनाधार रखने वाला नेता चुनाव हार सकता है तो फिर मनोहर लाल खट्टर जैसे नए नेता के लिए कुछ ही समय में खुद का पक्का जनाधार बनाना किसी भी तरह से आसान नहीं है।

खट्टर के कंधों पर रहेगी चुनाव जिताने की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सियासत की हकीकत को समझते हुए खुद को अपने बलबूते का नेता बनने का काम करना होगा। उनके ऊपर ने केवल खुद चुनाव जीतने की जिम्मेदारी होगी बल्कि पूरे प्रदेश में पार्टी को चुनावी जंग जिताने का जिम्मा भी उनके कंधों पर होगा। इसलिए अभी से मनोहर लाल खट्टर को उसी भूमिका के हिसाब से खुद को तैयार करना होगा।
कुछ समय पहले गुडगांव नगर निगम के चुनाव में मुख्यमंत्री को आइना दिखा दिया था कि उनको जनता का नेता बनने के लिए अभी काफी कुछ सीखने और करने की जरूरत है। अभी जनता उनके कहनेे पर वोट डालने के लिए तैयार नहीं है। जनता के दिलों पर राज करने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को कहीं बेहतर कार्य करके दिखाना होगा।

अफसरों के भरोसे रहना पड़ेगा महंगा

खरी खरी बात यह है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को अब चिंतन शिविर के अनुसार अपनी सरकार का पूरा हुलिया बदलने के अवावा जनता के करीब जाने के प्रयास करने होंगे। उनको अपनी सरकार की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात एक करना होगा। उनको अफसरशाही के भरोसे ही रहने की बजाए अपने पार्टी के नेताओं वर्करों की भी सुध लेनी होगी और समझदारी से सरकार चलानी होगी ।
उनकी सरकार ने बेशक कुछ ऐसे फैसले किए हैं जो उसको दूसरी सरकारों से अलग लुक देती है मगर अभी तक वह सबसे बढ़िया सरकार देने में सफल नहीं रहे हैं। कई मामलों में सरकार पर सवालिया निशान खड़े हुए हैं।

सियासत की जमीन को समझना होगा खट्टर को

 अगर मुख्यमंत्री मनोहर लाल भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने का इरादा और सपना रखते हैं तो उनको जनता की जरूरतों को समझने के अलावा सियासत की जमीन के भी समझना होगा और उसके अनुसार ही वर्किंग करते हुए भविष्य की चुनावी रणनीति को तैयार करना होगा। वह ऐसा करने में सफल रहे तो फिर से जनता उनको सत्ता का सरताज बना सकती है और अगर वह ऐसा करने में सफल नहीं हुए तो जनता भाजपा को सत्ता से बेदखल करने में भी देर नहीं लगाएगी।

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