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बड़ी उठापटक के बाद धनखड़ को मिली कमान/dhanakd gets chair as Lucky Man

गहरी माथापच्ची के बाद धनखड़ के नाम पर हुई रजामंदी

मुख्यमंत्री के समर्थक या विरोधी की बजाय भाजपा हाईकमान ने बीच के नेता को सौंपी हरियाणा की कमान

बरोदा उपचुनाव के कारण गैर जाट नेता को प्रदेशाध्यक्ष बनाने का फैसला पलटा गया


कुलदीप श्योराण
नई दिल्ली। आखिरकार हरियाणा भाजपा को अपना नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने हरियाणा के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। भाजपा ने जाट नेता सुभाष बराला के बाद दूसरे जाट नेता ओपी धनखड़ पर विश्वास जताया है।
धनखड़़ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ,किसान मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं।

गहरी माथापच्ची के बाद हुआ फैसला

ओमप्रकाश धनखड़ को हरियाणा भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाने से पहले भाजपा हाईकमान को गहरी माथापच्ची के दौर से गुजरना पड़ा।
भाजपा हाईकमान के सामने हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष का फैसला करने से पहले दो बड़े सवाल थे।

सवाल नंबर एक –
सुभाष बराला की जगह जाट नेता को ही पार्टी की कमान सौंपी जाए या किसी गैर जाट नेता को जिम्मेदारी दे जाए।

सवाल नंबर दो –
मुख्यमंत्री के समर्थक नेता को जिम्मेदारी सौंपी जाए या मुख्यमंत्री के विरोधी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।

इन दोनों सवालों का निपटारा किए बिना हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का फैसला होना मुमकिन नहीं था।
सुभाष बराला की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए जाट नेताओं में कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़ और महिपाल ढांडा दौड़ में थे।
इसी तरह गैर जाट नेताओं में कृष्ण पाल गुर्जर, संदीप जोशी,नायब सैनी और कमल गुप्ता कतार में थे।
एक बार कृष्ण पाल गुर्जर को प्रदेशाध्यक्ष बनाने का फैसला भी ले लिया गया था लेकिन घोषणा से ठीक पहले ही भाजपा हाईकमान को यह बता दिया गया कि अगर जाट नेता को हटाकर किसी गैर जाट नेता को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो हरियाणा के जाट भाजपा के पूरी तरह खिलाफ हो जाएंगे और उसका खामियाजा उन्हें सबसे पहले बरोदा उपचुनाव में झेलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
हरियाणा की सियासत में जाट वोटरों की निर्णायक भूमिका होने के कारण भाजपा हाईकमान को यह हकीकत समझ में आ गई। इसलिए कृष्ण पाल गुर्जर की ताजपोशी को रोककर जाट नेता को ही प्रदेशाध्यक्ष का फैसला लिया गया।
हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मुख्यमंत्री की पसंद और नापसंद भी खास मायने रखती थी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने विश्वासपात्र सुभाष बराला को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखना चाहते थे लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में बराला की हार और पार्टी संगठन की मजबूती के लिए उनकी उपलब्धियां प्रभावशाली नहीं होने के कारण भाजपा हाईकमान ने उनको बनाए रखने से मना कर दिया।
बराला को नहीं बनाए जाने पर मुख्यमंत्री खट्टर पानीपत ग्रामीण के विधायक महिपाल ढांडा को प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहते थे लेकिन हरियाणा के जानकारों ने हाईकमान को अपनी रिपोर्ट में बता दिया कि “खड़ाऊ” नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बजाय जनता में पहचान रखने वाले नेता को ही कमान सौंपने पर ही पार्टी को कुछ फायदा होगा।
सारे आकलनों के निचोड़ के बाद भाजपा के पुराने नेताओं में कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ ही दौड़ में अंतिम समय तक बचे थे। कैप्टन अभिमन्यु को लेकर मुख्यमंत्री रजामंद नहीं हुए क्योंकि उनको यह लगता है कि कैप्टन अभिमन्यु अगर मजबूत पोजीशन में आ गए तो उनके साथ ट्यूनिंग बिठाना आसान नहीं होगा और भविष्य की सियासत में भी कैप्टन अभिमन्यु उनकी राह का रोड़ा बन जाएंगे।
इसलिए उन्होंने कैप्टन के नाम पर वीटो करते हुए ओमप्रकाश धनखड़ के नाम पर रजामंदी जता दी।
ओमप्रकाश धनखड़ को अमित शाह, नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा के साथ किए पुराने कार्यों का भी फायदा मिला जिसके चलते उनके नाम को लेकर विरोध नहीं हुआ।
भाजपा हाईकमान ने समझदारी दिखाते हुए न तो मुख्यमंत्री के समर्थक नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और ना ही उनके प्रतिद्वंदी को हरियाणा की कमान सौंपी। इनकी बजाय मुख्यमंत्री से ठीक-ठाक रिश्ते रखने वाले और फील्ड में सबसे ज्यादा घूमने वाले ओमप्रकाश धनखड़ को हरियाणा की कमान सौंप दी गई।

खरी खरी बात यह है कि भाजपा हाईकमान यह समझ गया कि अगर जाटों को दरकिनार किया गया तो भाजपा फिर उसी जगह पहुंच जाएगी,जहां से शिखर का सफर शुरू किया था।
सामाजिक समरसता के लिए जाटों को मुख्यधारा में शिखर के दो में से एक पद पर रखना जरूरी था।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ उनके ही गृह क्षेत्र में फील्ड में सक्रिय सबसे मजबूत चेहरे को पार्टी की कमान सौंपकर भाजपा हाईकमान ने परफेक्ट फैसला लिया है।
कैप्टन अभिमन्यु भी इस दृष्टिकोण से फिट बैठ रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री का विरोध और जेपी नड्डा से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समय की दोस्ती व प्रधानमंत्री मोदी से गुजरात के जमाने की दोस्ती भी धनखड़ को ताकत देने का आधार बनी।
भाजपा ने ठीक बरोदा उपचुनाव से पहले धनखड़ को प्रदेशाध्यक्ष घोषित किया है, ताकि हुड्डा के दबदबे वाली बरोदा सीट पर चुनावी फायदा उठाया जा सके।
धनखड़ बरोदा चुनाव में गठबंधन प्रत्याशी को कितना फायदा दिला पाएंगे यह तो समय ही बताएगा लेकिन उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने जाटों के खुले विरोध से खुद को जरूर बचा लिया है।

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