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कार्यकारिणी भंग करके मुसीबत में फंसी जेजेपी/jjp finds no better options

बदलाव के लिए नहीं मिल पा रहे दमदार चेहरे

कुलदीप श्योराण
चंडीगढ़। संगठन में बदलाव के लिए सभी प्रकोष्ठ और कार्यकारिणी भंग करना जेजेपी हाईकमान के लिए मुसीबत बन गया है।
पुराने पदाधिकारियों को हटाकर नए पदाधिकारियों को बनाना जेजेपी रणनीतिकारों के लिए जी का जंजाल बन गया है।
इसका कारण यह है कि जेजेपी में पुराने पदाधिकारियों की जगह दमदार नए पदाधिकारी मौजूद नहीं है जिसके चलते कार्यकारिणी में बदलाव के मंसूबे लक्ष्य से भटकते हुए नजर आ रहे हैं।

दमदार चेहरों का अकाल

जेजेपी में सभी प्रमुख चेहरों को कार्यकारिणी या प्रकोष्ठ में एडजस्ट कर दिया गया था। उनके अलावा जेजेपी में दमदार चेहरों का अकाल है।
पुरानी कार्यकारिणी को भंग करने के बाद नए सिरे से नए चेहरों को बड़े जिम्मेदारियों पर बैठाना सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन दुष्यंत चौटाला के पास जिम्मेदारी बदलने के लिए तगड़े सिपहसालार ही नहीं है।
उन्हें बदलाव के लिए दमदार विकल्प नहीं मिल पा रहे हैं जिसके चलते उन्हें पुराने चेहरों को ही अदल बदलकर के जिम्मेदारियां सोचने को मजबूर होना पड़ेगा।
खरी खरी बात यह है कि इनेलो के विभाजन और जेजेपी के गठन के समय दुष्यंत चौटाला के साथ वर्करों की भारी फौज तो आ गई थी लेकिन इनेलो के ए और बी कतार के नेताओं ने दुष्यंत चौटाला से दूरी बनाए रखी जिसके चलते रसूख और पकड़ के मामले में दमदार चेहरे जेजेपी को नहीं मिल पाए। राजनीतिक समीकरणों और चुनावी माहौल के बीच दुष्यंत चौटाला कामयाबी हासिल करते हुए उप मुख्यमंत्री जरूर बन गए हैं लेकिन उनके पास मजबूत सहयोगियों की कतार नहीं है।
जेजेपी के संगठन में सभी बड़े चेहरों को अर्जेस्ट कर दिया गया था। संगठन में नए सिरे से बदलाव के तहत नए लोगों को जिम्मेदारी देने के लिए दुष्यंत चौटाला के पास दमदार चेहरे ही नहीं है। उन्हें पुराने चेहरों को ही जिम्मेदारियां देनी पड़ेगी जेजेपी सिर्फ और सिर्फ दुष्यंत चौटाला के बलबूते पर ही चल रही है।
जेजेपी को मजबूत बनाने के लिए विधायक ईश्वर सिंह, विधायक रामकरण काला, विधायक रामनिवास, विधायक जोगीराम सिहाग और पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के समर्थकों को भी संगठन में लेना जरूरी है लेकिन अभी तक की प्रक्रिया में इन नेताओं से संगठन के लिए समर्थकों की सूची ही नहीं मांगी गई है।
इसससे यह साबित हो जाता है कि दुष्यंत चौटाला को अपने ही नेताओें पर पूरा भरोसा नहीं है और इसलिए उनके नजदीकियों को जेजेपी के संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां नहीं दी जाएंगी।
पार्टी संगठन के नाम पर जेजेपी काम चलाऊ ढर्रे पर चल रही है।
जेजेपी के पास दमखम वाले चेहरे नहीं है। इसलिए बदलाव की इच्छा के बावजूद जेजेपी के संगठन में ऐसा बदलाव नहीं आ पाएगा जो उसे संगठन के तौर पर पहले से ज्यादा मजबूत कर सके।

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